जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को अंतरिम आवास सुरक्षा पाने के लिए मुकदमे के खत्म होने का इंतजा…
यह मामला कुपवाड़ा की एक महिला की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने प्रिंसिपल सेशंस जज के आदेश को चुनौती दी थी। सेशंस जज ने ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश को रद्द कर दिया था, जि…
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय धर ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (DV Act) की धारा 23 के दायरे की पड़ताल की। यह धारा मजिस्ट्रेट को कार्यवाही के द…
अदालत ने कहा, "मजिस्ट्रेट को रहने की जगह की अंतरिम सुरक्षा देने से पहले पूरा ट्रायल करने की जरूरत नहीं है।" इसके बजाय, अदालत के सामने पेश सामग्री के आधार पर मजिस्ट्रेट को…
जस्टिस धर ने इस बात पर जोर दिया कि घरेलू हिंसा कानून का उद्देश्य सुरक्षात्मक है। उन्होंने कहा कि आवास सुरक्षा एक तत्काल राहत है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी…
हाईकोर्ट ने माना कि सेशंस कोर्ट का यह मानना कि आवास की राहत केवल ट्रायल खत्म होने पर ही दी जा सकती है, डीवी एक्ट के विधायी उद्देश्य के खिलाफ है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने…
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