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बोडो समझौते पर सरकार का बड़ा कदम

(फोटो: IANS)

बोडो समझौता को लेकर लोगों के मन में काफी सवाल उठते ही है चलिए हम आपको सबसे पहले यह क्या है, आपने कहीं बोडो और कहीं बोरो सुना होगा तो यह दोनों एक ही हैं। बोडो समुदाय के लोग इसको बोरो बोलते हैं और सामान…

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बोडो के चार अलगाववादी गुटों समेत कुल नौ संगठनों ने असम और केंद्र सरकार के साथ समझौता कर अलग राज्य की मांग छोड़ दी। यहां हम आपको बताना जरूरी समझते हैं कि उन्होंनें कभी भारत से अलग होने की मांग नहीं की.…

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इसके साथ ही बोडो की सांस्कृतिक पहचान को बचाये रखने के लिए बोडो भाषा को असम की दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा देने के साथ बोडो आंदोलन में मारे गए. लोगों के प्रत्येक परिवार को 5 लाख का मुआवजा भी दिया जाएगा.

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आईए जानते हैं कि बोडो समुदाय की आबादी ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर में किनारे पर रहती है, अपनी अलग पहचान मानते हुए, बोरो समुदाय के लोगो ने सबसे पहले 1920 में साइमन कमीशन से मुलाकात की थी और असम विधानसभा म…

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क्या ये बोडो समुदाय के साथ पहला समझौता है , जी नहीं , इस से पहले भी 1993 और 2003 में भी दो समझौते हो चुके हैं .1993 का समझौता भारत सरकार, राज्य सरकार, ABSU और बोडो पीपल्स ऐक्शन कमिटी के बीच हुआ था इसी…

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2003 में दूसरा समझौता सरकार और बोडो लिब्रेशन टाइगर्स के बीच हुआ. BLT के 2,641 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया (बीएलटी की स्थापना 18 जून 1996 को प्रेम सिंह ब्रह्मा के नेतृत्व में की गई थी। इस समझौते के बाद ब…

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