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क्या काला बंदर को देख जज ने सुनाया था रामजन्मभूमि का ताला खुलवाने का फैसला ?

(फोटो: IANS)

फ़ैज़ाबाद ज़िला अदालत 1 फ़रवरी 1986 को विवादित स्थल का ताला खोलने का आदेश नहीं देती तो ये विवाद इस क़दर विध्वंसक साबित नहीं होता. कारसेवकों पर गोलियाँ नहीं चलाई जातीं, देश भर में सांप्रदायिक माहौल नही…

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पर द्वेष, घृणा, अविश्वास और हिंसा से लबालब भरे बाँध के गेट खोलने के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाए-- अनाम वकील उमेश चंद्र पांडेय को जिन्होंने ताला खोलने की अर्ज़ी दी, फ़ैज़ाबाद के जिला जज कृष्णमोहन पा…

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वो काला बंदर ज़िम्मेदार है जो फ़ैज़ाबाद की ज़िला अदालत की छत पर फ़्लैग-पोस्ट पकड़ कर भूखा-प्यासा बैठा रहा और जिसकी 'दैवीय प्रेरणा' से प्रभावित होकर ज़िला जज कृष्णमोहन पांडेय ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभू…

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राम जन्मभूमि विवाद में काले बंदर की भूमिका का ज़िक्र 'युद्ध में अयोध्या' नाम की किताब में आया है. इसे अयोध्या विवाद की पाँच ऐतिहासिक तारीख़ों - मस्जिद में चुपचाप मूर्तियाँ रखना, मस्जिद-जन्मभूमि का ताल…

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फैजाबाद के तब के जिला जज कृष्णमोहन पांडेय ने बात-बात में खुद ही यह भेद खोला.पांडेय जी साल 1991 में छपी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं-“जिस रोज मैं ताला खोलने का आदेश लिख रहा था, मेरी अदालत की छत पर एक काल…

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