बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो आम की बेकार समझी जाने वाली गुठलियों को मूल्यवान उत्पादों में बदल सकती है। इस नवाचार…
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रक्रिया में 'रिफ्रैक्टेंस विंडो ड्राइंग' और 'कोल्ड-प्रेस एक्सट्रैक्शन' जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। विश्वविद्यालय के वै…
बीएयू सबौर के नेचर क्लब के सचिव और कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश पॉल ने बताया कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के एक अभियान से शुरू हुई। क्लब के स्वयंसेवक बच्चों को पौधारोपण के लिए…
कृषि वैज्ञानिक डॉ. कंचन कुमारी के मुताबिक, आम का गूदा इस्तेमाल होने के बाद बची हुई गुठलियों को पहले धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद आधुनिक मशीनों से उनका प्रसंस्करण कर प…
बागवानी विभाग के चेयरमैन डॉ. अहमार आफताब ने इस खोज के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आम के कुल आकार का 10 से 23 प्रतिशत हिस्सा गुठली का होता है। पारंपरिक रूप से…
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