सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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डिजिटल सुरक्षा में 'संचार साथी' की बड़ी कामयाबी, 5,000 करोड़ की धोखाधड़ी पर लगाई लगाम

भारत सरकार का 'संचार साथी' पोर्टल डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम हथियार बनकर उभरा है। मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से इस पोर्टल पर 30 करोड़ से ज़्यादा विज़िट दर्ज की गई हैं, जो नागरिकों के बीच…

डिजिटल सुरक्षा में 'संचार साथी' की बड़ी कामयाबी, 5,000 करोड़ की धोखाधड़ी पर लगाई लगाम
(फोटो: IANS)

भारत सरकार का 'संचार साथी' पोर्टल डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम हथियार बनकर उभरा है। मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से इस पोर्टल पर 30 करोड़ से ज़्यादा विज़िट दर्ज की गई हैं, जो नागरिकों के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता और भरोसे को दिखाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल ने साइबर धोखाधड़ी से होने वाले 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित नुकसान को रोकने में सफलता हासिल की है।

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संचार मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी बयान में बताया गया कि यह पोर्टल सिर्फ़ वित्तीय धोखाधड़ी रोकने तक ही सीमित नहीं है। इसकी मदद से अब तक 14 लाख से ज़्यादा खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट भी बरामद किए जा चुके हैं। यह नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नागरिकों के लिए क्या हैं सुविधाएँ?

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित 'संचार साथी' पोर्टल आम मोबाइल यूज़र्स को कई शक्तिशाली और उपयोग में आसान टूल उपलब्ध कराता है। इसके ज़रिए कोई भी नागरिक ये काम आसानी से कर सकता है:

  • अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक करना।
  • यह पता लगाना कि उनके नाम पर कुल कितने मोबाइल कनेक्शन जारी किए गए हैं।
  • किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की शिकायत दर्ज करना।
  • कोई भी पुराना हैंडसेट खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जाँच करना।

मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि पोर्टल पर आने वाला हर नागरिक न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देकर दूसरों को भी बचाता है। इस तरह, हर यूज़र साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक 'साइबर योद्धा' की भूमिका निभा रहा है। अब तक 4 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने अपने नाम पर जारी कनेक्शनों की जानकारी के लिए अनुरोध किया है, जिसे पोर्टल ने सफलतापूर्वक पूरा किया है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जब कोई नागरिक 'संचार साथी' पर कोई जानकारी देता है, तो सिस्टम उसे उपयोगी सूचना में बदल देता है। इस जानकारी को दूरसंचार विभाग, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है, जिससे वे धोखेबाजों को अगला शिकार बनाने से पहले ही रोक पाते हैं। पोर्टल को बेहद यूज़र-फ्रेंडली बनाया गया है और यह अंग्रेज़ी, हिंदी सहित 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे इसकी पहुँच व्यापक हो गई है। इसका एक मोबाइल ऐप भी है, जो लोगों को अपनी भाषा में ये सभी सुविधाएँ मुहैया कराता है।

इनपुट: IANS

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