बीजेपी से अलग रास्ते पर चल रहे हैं वरूण गांधी, रोहिंग्या मुद्दे पर सरकार और पार्टी से अलग स्टैंड

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तारीख 15 मार्च 2009 बोलने वाले वरूण गांधी पीलीभीत उत्तर-प्रदेश से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार। क्या बोला था ये पढ़िए, “अगर कोई हिंदुओं की ओर हाथ बढ़ाता है या फिर ये सोचता हो कि हिंदू नेतृत्वविहीन हैं तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा।” साहेब यहीं चुप नहीं रहे थे। आगे क्या कहा था ये पढ़िए, “गांधीजी कहा करते थे कि कोई इस गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके सामने दूसरा गाल कर दो ताकि वह इस गाल पर भी थप्पड़ मार सके। यह क्या है? अगर आपको कोई एक थप्पड़ मारे तो आप उसका हाथ काट डालिए कि आगे से वह आपको थप्पड़ नहीं मार सके।” वरूण के इस बयान पर तब तगड़ी राजनीति हुई थी। यहां तक कि उनके चुनाव लड़ने पर भी खतरा मंडराने लगा था। लेकिन तब चुनाव आयोग और कोर्ट ने उन्हें चेतावनी देकर छौड़ दिया था। दरअसल वरूण के इस बयान को मुस्लिम समाज के विरूद्ध माना गया था।

सुल्तानपुर से भारतीय जनता पार्टी सांसद वरुण गांधी एक बार फिर से चर्चा में हैं। दरअसल वरूण ने रोहिंग्या मसले पर मोदी सरकार को अतिथि देवो भव: की परंपरा याद दिलाई है। वरुण ने एक लेख में कहा कि भारत को रोहिंग्या की मदद करनी चाहिए। वरुण ने लिखा है कि हमें म्यांमार रोहिंग्या को शरण देनी चाहिए, लेकिन उससे पहले वैध सुरक्षा चिंताओं का आकलन भी करना चाहिए। गौरतलब है कि वरुण का यह स्टैंड सरकार के रुख से बिल्कुल अलग है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे में रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता चुके हैं।

आतिथ्य सत्कार का पालन करें

वरुण ने लिखा कि हमें शांतिपूर्ण उपायों से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उन्हें स्वेच्छा से घर वापसी में मदद करनी चाहिए। आतिथ्य सत्कार और शरण देने की अपनी परंपरा का पालन करते हुए हमें शरण देना निश्चित रूप से जारी रखना चाहिए।

एक हिंदी अखबार के लिए लिखे लेख में वरुण ने कहा कि आजादी के बाद से करीब 4 करोड़ लोग भारत की सीमा लांघ चुके हैं अब और भी शरणार्थी आने की तैयारी में है। वरुण ने लिखा कि भारत ने शरणार्थियों को लेकर बहुत सी संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसके लिए कोई कानून नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत उत्पीड़न से भागने वाले और गरीबी से भागने वाले शरणार्थियों की पहचान होनी चाहिए।

वरुण ने मौजूदा समय में देश में रह रहे शरणार्थियों की समस्या का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि शरणार्थियों के लिए निवास की व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या है, दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर अफगानियों और म्यांमारियों को मकान मालिकों के भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

ऐसे बयान क्यों दे रहे वरूण गांधी

माना ये जा रहा कि वरूण गांधी का अब भाजपा में कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है, क्योंकि सरकार तो दूर पार्टी के बड़े नेताओं तक भी उनकी पहुंच नहीं है। हालांकि उनकी मां केंद्र सरकार में भले ही मंत्री हैं। लेकिन वरूण का राजनीतिक भविष्य अंधेरे में है। पिछले दिनों तो ये खबर भी आई थी कि वरूण गांधी राहुल और प्रियंका गांधी से भी गुपचुप तरीके से मिल रहे हैं, वरूण का कांग्रेस में भी जाने के कयास लगाए जा रहे थे।

माना तो ये भी जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी भी उनसे नाराज है। ऐसे में केंद्र सरकार के इतर जाकर वरूण गांधी का रोहिंग्या मुस्लमानों पर बयान देना कोई बड़ी बात नहीं है। इससे ये भी साबित होता है कि वरूण गांधी अपना रास्ता कहीं और तलाश रहे हैं या फिर अपने लिए खुद रास्ता तैयार कर रहे हैं।

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