उत्तर प्रदेश: मॉब लिंचिंग की घटनाये रोकने के लिए योगी सरकार ने बनाई बड़ी योजना, हर जिले में होगी टास्क फोर्स

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मॉब लिंचिंग की घटनाये रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा प्लान बनाया है. इस योजना के तहेत योगी सरकार ने हर जिले में एक टास्क फोर्स बनाई है. यह टास्क फोर्स उन लोगों लोगों पर नज़र रखेंगे जो अफवाहों के जरिये दंगे या भावनाए भड़काने का काम करते है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया अपना जवाब

को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान उत्तर सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कहा गया कि उन्होंने 17 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट अनुपालन किया है. मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है. नोडल ऑफिसर की तरफ से टास्क फोर्स का गठन किया है, जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते है या अफ़वाह के जरिये माहौल बनाने की कोशिश करते हैं. इसके साथ ही नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा.

दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की- राजस्‍थान

वहीं, इस मामले में राजस्थान सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाख़िल किया गया और कहा गया कि अलवर में मॉब लिंचिंग के मामले में आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. सरकार ने ये भी कहा कि आज ही आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत में चार्जशीट दायर की जाएगी. सरकार ने ये भी कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है और उनपर जुर्माना भी लगाया है.

मॉब लिंचिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कदम उठाने के दिए थे निर्देश

दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इस बारे में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश जारी किया था.

कोर्ट ने मॉब लिंचिंग और गौरक्षा के नाम पर होने वाली हत्याओं को लेकर कहा था कि कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता. डर और अराजकता की स्थिति में राज्य सरकारें सकरात्मक रूप से काम करें. कोर्ट ने संसद से यह भी कहा था कि वो देखे कि इस तरह की घटनाओं के लिए कानून बन सकता है क्या?