रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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यूपी: कफ सिरप की आड़ में 3 करोड़ का नशा, बांदा में चार तस्करों को STF ने दबोचा

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बांदा जिले में STF ने…

यूपी: कफ सिरप की आड़ में 3 करोड़ का नशा, बांदा में चार तस्करों को STF ने दबोचा
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बांदा जिले में STF ने करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य की अवैध कोडीन युक्त कफ सिरप की 30,000 शीशियां जब्त की हैं। इस मामले में गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

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गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान बांदा निवासी धीरेंद्र कुमार, अतर्रा के प्रवीण कुमार उर्फ लकी और रोहित पांडेय के अलावा हापुड़ निवासी शेखर सिंह के रूप में हुई है। एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से कफ सिरप की खेप लाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में नशे के लिए बेचता है।

इस तरह दिया गया ऑपरेशन को अंजाम

सूचना के आधार पर एसटीएफ की प्रयागराज यूनिट ने गुरुवार को बांदा में जाल बिछाया। टीम को खबर मिली कि एक डीसीएम ट्रक में कफ सिरप की बड़ी खेप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते लाई जा रही है। बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर एक्सप्रेस-वे के गोल चौराहे के पास एसटीएफ ने डीसीएम और उसके आगे चल रही एक लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार को रोककर तलाशी ली। दोनों वाहनों से भारी मात्रा में अवैध कफ सिरप बरामद होने के बाद चारों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

कैसे काम करता था यह नशा गिरोह?

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले कोडीन सिरप की तस्करी करते थे। यह गिरोह दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप खरीदता था और फिर उसे यूपी के बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सप्लाई करता था। ये शीशियां मेडिकल स्टोर पर नहीं, बल्कि सीधे नशे के कारोबारियों को बेची जाती थीं। अधिक मुनाफा कमाने के लिए गिरोह सिरप का रैपर बदलकर उसे महंगे दामों पर बेचता था।

इस अवैध कारोबार को छिपाने के लिए फर्जीवाड़े का भी सहारा लिया जाता था। गिरोह के सदस्य जीएसटी के फर्जी बिल और इनवॉइस तैयार करते थे, जो हमीरपुर की एक ऐसी मेडिकल एजेंसी के नाम पर होते थे, जिसे वाणिज्य कर विभाग पहले ही 'बोगस फर्म' घोषित कर चुका था। जांच में यह भी पता चला कि माल की हर खेप सुरक्षित पहुंचाने के लिए ड्राइवर को 25,000 रुपये का इनाम अलग से दिया जाता था।

इसी बीच एक अन्य कार्रवाई में, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की वाराणसी यूनिट ने सोनभद्र के करमा थाना क्षेत्र से हिमांशु गौतम नाम के एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से करीब 80 लाख रुपये की हेरोइन बरामद हुई है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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