यूपी: पशुधन भर्ती घोटाले में 8 साल बाद बड़ी कार्रवाई, रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश में लगभग आठ साल पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बुधवार को लखनऊ के गोमती नगर से तत्कालीन प्रमुख सचिव और…
उत्तर प्रदेश में लगभग आठ साल पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बुधवार को लखनऊ के गोमती नगर से तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 1980 बैच के अधिकारी योगेश कुमार पर भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और धांधली करने का आरोप है।
यह मामला साल 2014 का है, जब योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। उस समय विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1,198 रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा भी आयोजित हुई थी।
क्या हैं भर्ती घोटाले के आरोप?
जांच में सामने आया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित सेवा नियमावली का पालन नहीं किया गया। EOW के मुताबिक, OMR शीट के मूल्यांकन से लेकर मेरिट सूची तैयार करने तक में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को OMR शीट के केंद्रीकृत मूल्यांकन का काम सौंपा गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि नियमों के विरुद्ध लिए गए इस फैसले के बाद OMR शीट में छेड़छाड़ की गई, जिससे कई योग्य अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए और अपात्रों को नौकरी मिल गई।
जांच और अब तक की कार्रवाई
इस घोटाले की जांच 2017 में विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई थी, जिसने 2019 में SIT थाने में मुकदमा दर्ज कराया। मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120बी, 201 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप तय किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस केस में कुल 28 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, जिनमें से 25 के खिलाफ आरोपपत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। योगेश कुमार की गिरफ्तारी को इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इनपुट: IANS



