यूपी: 'जल सखियों' ने बदली गांवों की तस्वीर, 1.43 करोड़ से ज़्यादा पानी के नमूनों की जांच कर सुनिश्चित की शुद्धता
उत्तर प्रदेश के गांवों में अब पीने के पानी की शुद्धता की कमान महिला शक्ति के हाथों में है। जल जीवन मिशन के तहत एक बड़ी पहल करते हुए, लगभग पांच लाख प्रशिक्षित महिलाओं ने अब तक 1.43 करोड़ से ज़्यादा…
उत्तर प्रदेश के गांवों में अब पीने के पानी की शुद्धता की कमान महिला शक्ति के हाथों में है। जल जीवन मिशन के तहत एक बड़ी पहल करते हुए, लगभग पांच लाख प्रशिक्षित महिलाओं ने अब तक 1.43 करोड़ से ज़्यादा पानी के नमूनों की जांच की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह महिलाएं न केवल हर घर तक पहुंच रहे नल के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही हैं, बल्कि इस काम से उन्हें आय का एक नया ज़रिया भी मिला है।
इन महिलाओं को 'सुजलाम शक्ति समूह' के रूप में संगठित किया गया है। इन्हें फील्ड टेस्ट किट (FTK) का उपयोग करके पानी की शुद्धता जांचने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये महिलाएं गांवों में जलस्रोतों की निगरानी करती हैं और साथ ही स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी के उपयोग और जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक भी करती हैं।
जांच का विशाल नेटवर्क और आंकड़े
जल जीवन मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए एक मज़बूत ज़मीनी ढांचा तैयार किया गया है। मिशन के पहले चरण में हर राजस्व गांव से पांच महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया था, जो अब दूसरे चरण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 39,47,102, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440, 2025-26 में 5,51,221 और 2026-27 में अब तक 23,34,754 नमूनों की जांच पूरी हो चुकी है।
प्रशिक्षण और आय का स्रोत
सुजलाम शक्ति समूहों के लिए स्वयं सहायता समूहों की प्रशिक्षित महिलाओं, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को पात्रता के आधार पर चुना गया है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें फील्ड टेस्ट किट दी जाती है, जिससे वे पानी में आयरन, नाइट्रेट और क्लोराइड जैसी अशुद्धियों की प्राथमिक जांच करती हैं। यह सभी जांच भारतीय मानक आईएस-10500:2012 के आधार पर होती हैं।
ये महिलाएं हर महीने घरों में लगे नल कनेक्शन, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और हैंडपंपों से पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच करती हैं। इस काम के लिए उन्हें निर्धारित मानदेय का भुगतान भी किया जाता है, जिससे यह योजना महिला सशक्तिकरण का एक माध्यम भी बन गई है।
आधिकारिक पक्ष
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है।" उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान करने पर भी विभाग काम कर रहा है।
इनपुट: IANS



