UP Assembly: सवाल अखिलेश यादव के, लेकिन लपेट लिया योगी आदित्यनाथ ने

0
51

UP Assembly: सवाल अखिलेश यादव के, लेकिन लपेट लिया योगी आदित्यनाथ ने

लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है। मंगलवार को प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव में जमकर बहस हो गई। अखिलेश ने प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ियों पर सवाल उठाया तो योगी ने उन्हें ही लपेटे में ले लिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश की बातों में सत्ता जाने का दुख दिखता है लेकिन जनता जनार्दन के फैसले को मानना ही होगा। उन्होंने कोरोना काल में समाजवादी पार्टी के बर्ताव पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने वैक्सीन को लेकर लोगों में भ्रम पैदा किया। इसके अलावा गोरखपुर और आसपास के इलाकों में इंसेफेलाइटिस की रोकथाम को लेकर सपा सरकार की ओर से कुछ नहीं किए जाने पर भी अखिलेश को लताड़ लगाई।

दरअसल, अखिलेश ने सदन में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जान गंवाने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल बदहाल हैं और इसके लिए सरकार के ही मंत्री शर्मिंदा होते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग में भर्तियों को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार स्टाफ की कमी का हवाला देती है और आउटसोर्स नौकरी देने के नए तरीके के रूप में लेकर आई है। सरकार चाहती है कि सरकारी अस्पताल बंद हो जाएं और प्राइवेट खुल जाएं।

अस्पतालों को सुविधा कब मिलेगीः अखिलेश
उन्होंने योगी सरकार से कहा कि मैं चाहता हूं कि सरकार कम से कम स्वास्थ्य विभाग को तो बेहतर करे। आप दावा करते हैं कि बजट में कमी नहीं है। आप बजट देंगे तो आपके डॉक्टर प्राइवेट में नहीं जाएंगे। जानबूझकर सरकार सरकारी अस्पातलों को बर्बाद कर रही है, ताकि डॉक्टर प्राइवेट में चले जाएं। उन्होंने कहा कि जो सुविधा पीजीआई को मिलती थी, हमने वही केजीएमयू और लोहिया को दी। गोरखपुर या प्रदेश के अस्पतालों को वह सुविधा कब मिलेगी?

पर उपदेश कुशल बहुतेरे
अखिलेश के सवालों का जवाब देते हुए शुरुआत में योगी व्यंग्यात्मक अंदाज में दिखे। उन्होंने कहा कि अखिलेश जी की बातों से बहुत स्पष्ट हो रहा था कि ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’। उनको यह भी नहीं पता था कि वह जो बोल रहे हैं आखिर किसको बोलना चाह रहे हैं? इस प्रदेश में चार बार सपा की सरकार रही है और 135 करोड़ की आबादी में से कोई भी सपा को एक सही नजरिये से नहीं देखता।

Copy

उन्होंने कहा कि नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े जो आए हैं, वो गवाही देते हैं कि यूपी में साढ़े पांच साल में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरीन सुधार हुआ है। चाहे वह एनीमिया से जुडे़ मामलों की बात हो या शिशु-मातृ मृत्युदर की बात हो। पहले की तुलना में इसमें काफी सुधार हुआ है। अन्य मामलों में भी अच्छी प्रगति हुई है। योगी ने कहा कि गोरखपुर की चर्चा नेता प्रतिपक्ष ने की। बोलते-बोलते उनको बहुत-सी चीजें याद आती हैं। सपने जब तार-तार होते हैं तो दुख होता है और उनकी बातों में यह दुख झलकता है लेकिन जनता जनार्दन के फैसले का स्वागत करना होगा।

इंसेफेलाइटिस पर सपा सरकार को घेरा
योगी ने कहा कि इंसफेलाइटिस को लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में भयानक माहौल होता था। लोगों में एक कंपकंपी छूटती थी। हर साल 2000 तक मौतें होती थीं। जो लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे, उसके आंकड़े अलग हैं। डबल इंजन की सरकार का ही प्रभाव है कि इंसेफेलाइटिस से मौत जीरो तक पहुंची है। विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कुछ लोगों ने जनता का ख्याल नहीं रखा लेकिन दुष्प्रचार करते थे। अनावश्यक एक नकारात्मक माहौल बनाते थे। वैक्सीन का विरोध करते थे।

योगी ने कहा कि राज्य सरकार को कहीं से प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं। सर्वे इस बात का प्रमाण उपलब्ध करा रहे हैं। गोरखपुर एम्स के मामले में सबसे बड़ी बाधा सपा ही थी। इन लोगों ने एम्स की भूमि को दिया ही नहीं, जब बीजेपी सरकार आई तो जमीन की रजिस्ट्री की कार्रवाई मेरा आदेश पर हुई। आज एम्स गोरखपुर में संचालित हो चुका है। इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित करने का काम बीजेपी ने किया। जितने भी संचारी रोग हैं, सभी के नियंत्रण के लिए तीन बार विशेष अभियान चलाने का काम भी बीजेपी सरकार आगे बढ़ाती है।

सपा और सच नदी के दो किनारेः योगी
योगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष पूर्व सीएम रह चुके हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा कि उनको सदन में सच बोलने की आदत होनी चाहिए। मैंने कहा था कि सपा और सच नदी के दो छोर हैं। अपने किए पर जब वह इस प्रकार की टिप्पणी करते हैं तो वह कटघरे में होते हैं। योगी ने कहा कि जो काम ये नहीं कर पाए हैं, वो बीजेपी कर रही है तो कम से कम इसमें सहयोग नहीं तो अड़ंगा लगाने का काम तो इन्हें नहीं करना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में सरकार ही नहीं विपक्ष भी लोकतंत्र का एक पहिया है।

अखिलेश को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसा वक्तव्य नहीं देना चाहिए जो सत्य से परे हो और जो भ्रांति पैदा करते हुए लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाला हो। कोरोना के मामले में हमने देखा था, जब उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन नहीं लेंगे। ये फ्री में वैक्सीन था, WHO ने इसको मान्यता दी थी। इंसेफेलाइटिस का वैक्सीन जापान में 1905 में बन गया था लेकिन इसे भारत में आने में 100 साल लग गए। क्या कर रहे थे हम आजादी के बाद? 1947 से 2005 तक क्या हो रहा था? इंसेफ्लाइटिस से मरने वाले ज्यादातर बच्चे कौन थे? अल्पसंख्यक, पिछड़े जाति के लोग थे। लोगों ने पिछड़ों और दलितों को लेकर वोट बैंक बनाने का काम किया, लेकिन इन पर ध्यान नहीं दिया।

राजनीति की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – राजनीति
News