फिल्म रिव्यू: “टॉयलेट एक प्रेम कथा” बिना पढ़े देखेंगे तो होगा नुकसान

अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की फिल्म “टॉयलेट एक प्रेम कथा” शुक्रवार को रिलीज हो चुकी है। श्री नारायण सिंह के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म एक दुल्हन की कहानी है, जो ससुराल में शौचालय नहीं होने के कारण पति को छोड़कर मायके चली जाती है।

फिल्म की ओपनिंग मजेदार है, कहानी मथूरा के नंदगांव की है, जहां अक्षय कुमार की शादी मांगलिक दोष कटवाने के लिए एक भैंस से करवाई जाती है, ताकि उसकी शादी हो सके। उसके बाद अक्षय अपनी शादी के लिए दुल्हन ढूंढना शुरू करते हैं। इसी दौरान अक्षय की मुलाकात भूमि से होती है और उन्हें बिल्कुल बॉलीवुड वाले अंदाज में प्यार हो जाता है, फिर शादी और सुहाग रात। रात के बाद जैसे ही सुबह होती है दुल्हन को पता चलता है कि घर में शौचालय नहीं है। इस पर जया यानि कि भूमि ससुराल छोड़कर अपने मायके चली जाती है। और फिर शुरू होती है अक्षय की अपने समाज और सरकार के खिलाफ लड़ाई, जो जाकर हैपी ऐंडिंग पर खत्म होती है।

अभिनय

अक्षय और भूमि ने फिल्म को अपने अभिनय से मजबूत बना दिया है, भूमि हर जगह हर संवाद में फिट बैठती हैं लेकिन अक्षय स्थानीय भाषा के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं और कहीं-कहीं तो वो केशव के नहीं बल्कि अक्षय की भूमिका में नजर आने लगते हैं।

स्क्रीनप्ले

स्क्रीनप्ले की बात करें तो फर्स्ट हाफ में फिल्म अपने मैसेज के लिए मजबूत साबित होता है लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म स्वच्छता अभियान पर सरकारी प्रचार का माध्यम बन जाती है। फिल्म बस बड़े कलाकारों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। पूरी फिल्म में ये लगता है कि शौचालय की समस्या भूमि के सिवा और किसी महिला की है ही नहीं । बस अंत में महिलाओं का विरोध दिखाकर फिल्म को खत्म कर दिया गया है। कुछ चीजें जबरदस्ती की भी लगती हैं जो नहीं होता तो फिल्म ज्यादा वास्तविक लगती।

डायरेक्शन

डायरेक्शन के मामले में फिल्म अच्छी है।

साऊंड और म्यूजिक

साऊंड और म्यूजिक अच्छे हैं। गाने को जबरदस्ती नहीं डाला गया है।

संवाद

संवाद को हास्यव्यंग्य का रूप दिया गया है। जया यानि भूमि पेडनेकर का संवाद अपने स्वसुर, पति या गांव की महिलाओं से बात करते हुए उसके पात्र को मजबूत बनाते हैं ।

लोकेशन

लोकेशन को लेकर ज्यादा कुछ किया जा सकता था, क्योंकि जिस तरह की सोच को फिल्म दर्शाती है उस हिसाब से लोकेशन को और ज्यादा ग्रामीण दिखाया जा सकता था।

कलेक्शन

कलेक्शन के मामले में फिल्म अक्षय और यूपी में टैक्स फ्री के बल पर अव्वल साबित हो सकती है। छोटे शहरों के लोगों को फिल्म ज्यादा पसंद आएगी। वहीं बड़े शहर में फिल्म एवरेज प्रदर्शन कर पाएगी। फिल्म कुल मिलाकर एक अच्छा सामाजिक संदेश देता है।