मुहर्रम का ये नजारा जो सिर्फ दिखता है लखनऊ-हैदराबाद में देखने को

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नई दिल्ली: मुहर्रम इस्लामी महिना है. आज से ही इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है. लेकिन इस नए साल को मुसलमान खुशी के रूप में नहीं बल्कि दुख के रूप में मनाते है. इस दिन जुलुस निकालकर हुसैन की शहादत को याद किया जाता है. 10वें मुहर्रम पर रोज़ा रखने की भी परंपरा मानी जाती है.

कर्बला की लड़ाई में हजरत मुहम्मद के कई रिश्तेदार मारे गए थे

इस दिन कर्बला की लड़ाई में हजरत मुहम्मद के कई रिश्तेदार मारे गए थे. इसलिए देशभर के शिया मुसलमान इस दिन उनकी मौत का गम मनाते है. लखनऊ और हैदराबाद में यह बड़े पैमाने पर होता है. इस दिन लखनऊ और हैदराबाद की सड़कों पर मुहर्रम मनाने वालों का सैलबा काफी देखने को मिलता है. अब हम आपको बताने जा रहें है नवाबों के शहर लखनऊ और निजामों के शहर हैदराबाद में किस तरीके से मनाया जाता है मुहर्रम का दिन….

हैदराबाद में कैसे मनाते है मुहर्रम

मुहर्रम के दौरान हैदराबाद की सड़कों पर जुलुस निकलता है. यह जुलुस हैदराबाद के दारुल शिफा, नूर खान बाजार और पुरानी हवेली से होकर गुजरता है. इन जगहों में जाकर आप जुलुस देख सकते है. इस दिन एक नहीं बल्कि कई सारे जुलुस देखने को मिलते है. इन्हें देखने काफी तादात में लोगों देखने को आते है.

लखनऊ में कैसे बनाया जाता है मुहर्रम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज मुहर्रम के दिन सड़कों में काफी लोगों का जमावड़ देखने को मिलाता है. लखनऊ में देश के सबसे ज्यादा शिया मुसलमानों की आबादी देखने को मिलती है. यह पर जुलुस खासतौर पर लखनऊ के पुराने इलाके से होकर गुजरता है, जो मुख्य रूप से छोटा और बड़ा इमामबाड़ा इलाके से निकलता है. छोटा और बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ का सबसे फेमस प्रयत्न स्थल है. यह पर एक भूल-भुलैया और एक बावड़ी भी है.

आखिर क्यों मनाया जाता है मुहर्रम

इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, इराक में यजीद नाम का क्रूर बादशाह इंसानियत का दुश्मन था. यजीद अपने को खलीफा समझाता था, लेकिन अल्लाह के प्रति उसका कोई विश्वास नहीं था. वह चाहता था कि हजरत इमाम हुसैन उसकी तरफ हो जाए. लेकिन हुसैन को यह मंजूर नहीं था और उन्होंने यजीद के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था. पैगंबर-ए इस्‍लाम हजरत मोहम्‍मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार और दोस्तों समेत शहीद कर दिया गया था. जिस दिन हुसैन और उनके परिवार को शहीद किया गया था वो मुहर्रम का ही महीना था.