ये हैं उत्तर कोरिया के अजीबो-गरीब कानून, जंहा आज तक नहीं आया साल 2018

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नई दिल्ली: उत्तर कोरिया एक ऐसा देश है जिसकी कानून व्यवस्था अतरंगी है. इसी वजह से वह के लोगों को कई प्रकार की समस्यों का सामना करना पड़ता है. ये ही नहीं वह के तानाशाह किम जोंग उन के बारे में भी कई अजीबों बातें सामने आई है. लेकिन उत्तर कोरिया के कानून के बारे में बताएंगे तो आप भी आश्चर्यचकित रहे जाएंगे. जहां पूरी दुनिया में अभी तक साल 2018 चल रहा है, वहीं उत्तर कोरिया में साल 107 चल रहा है. इसके पीछे का अहम कारण यह है कि इस देश का कैलेंडर पूरी दुनिया से अलग है.

ये है उत्तर कोरिया का अजब-गजब कानून

बता दें कि इसके पीछे ये कारण है कि इस देश ने पूर्व तानाशाह किम इल-सुंग की जन्मतिथि 15 अप्रैल 1912 पर आधारित है. उत्तर कोरिया में हर पांच साल में चुनाव होता है. पर यहां पर किम के परिवार के अलावा किसी और तनाशाह को चुनने की आजदी नहीं है. इसलिए लोगों के पास कोई भी विकल्प नहीं होता. इसलिए सौ फीसदी मतदान किम के परिवार को ही जाता है. वहीं यहां के चौराहें पर ट्रैफिक लाइट या सिग्नल तक की भी व्यवस्था नहीं है. यहां पर पुलिसकर्मी इशारों से ट्रैफिक को नियंत्रित करती है.

देश में हेयर स्टाइल भी तय

उत्तर कोरिया में अपने हिसाब से हेयर स्टाइल नहीं करवा सकते है. यहां पर लगभग 28 प्रकार के हेयर स्टाइल को मान्यता दी है. जिसमें से 18 महिलाओं के लिए और 10 पुरुषों के लिए है. यह पर कोई भी ब्लू जींस नहीं पहन सकता है क्योंकि यहां कि सरकार की माने तो यह अमेरिका का पहनावा है.

साक्षरता दर अमेरिका के बराबर

उत्तर कोरिया का दावा है कि यहां की साक्षरता दर अमेरिका के बराबर 99 फीसदी तक है. यहां के लोगों अमेरिका के लोगों के बराबर साक्षर हैं. पर एक ये भी सच्चाई है कि आज भी आधी से ज्यादा आबादी गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहीं है.

उत्तर कोरिया में मात्र तीन टीवी चैनल

उत्तर कोरिया में मात्र तीन टीवी चैनल है. दो चैनल पर साप्ताहिक कार्यक्रम आता है तो एक चैनल पर धारावाहिक. यहां की जनता वो ही चीज देख सकती है जो यहां की सरकार उन्हें दिखाना चाहती है. यहां की जनता को बाहरी दुनिया की कुछ भी जानकारी नहीं होती है क्योंकि यहां पर सिर्फ उत्तर कोरियाई समाचार ही प्रसारित किया जाता है. इस देश में सिर्फ एक ही इंटरनेट कंपनी है, जो किसी अन्य भाषा में नहीं बल्कि कोरियाई भाषा में इटरनेट उपलब्ध कराती है. यहां पर सिर्फ 605 लोग ही इंटरनेट का प्रयोग करते हैं.

शिक्षकों को अकॉर्डियन बजाना जरूरी

इस देश में तानाशाह के नियमों को ही सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. जिसमें आरोपी की तीन पीढ़ियों को सजा भुगतनी पड़ती है. साल 1990 से ऊतर कोरिया में यह मुख्य माना गया है कि सभी शिक्षकों को अकॉर्डियन (हारमोनियम जैसा यंत्र) बजाना आना चाहिए. आज देश का तमाम नागरिक इस यंत्र को बजाना जनता है. जिसको बजाना नहीं आता है उसके लिए जुर्माने का भी प्रावधान है.

पॉर्न देखने पर फंसी की सजा

उत्तर कोरिया में कोई पॉर्न नहीं देख सकता है क्योंकि ऐसा करते हुए कोई पाया गया तो उसे दंड के तौर पर फंसी की सजा सुनाई जाती है. ये ही नहीं यहां कि पुस्तकों में केवल किम जोंग 1 और किम जोंग 2 की गाथाओं के बारे में ही पढ़ाया जाता है.