ये है देश के 12 ज्योतिर्लिंग जो स्थित है अलग-अलग स्थानों पर

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नई दिल्ली: आज दोस्तों आपको हम देश के 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में बताएंगे. जिसके के बारे में शायद ही आपको ज्यादा जानकारी होगी. 12 ज्योतिर्लिंग भगवन शिव के वो स्थान है जहां भगवान शिव स्वयं ही ज्योति रूप में विराजमान है. कहते है जिन लोगों ने इन बारह ज्योतिर्लिंगों का दर्शन किया है वो काफी भाग्यशाली होते है. तो चलिए जानते है भगवान शिव के उन्हीं 12 स्थानों के बारे में…..

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग:

ये मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को इस धरती का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है. कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी. इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी किया गया है.

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग:

आपको बता दें कि यह ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर विरजमान है. बताया जाता है इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान है. महाभारत के मुताबिक, श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव की पूजा करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है. जो भी श्रीशौल के दर्शन करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते है. तमाम प्रकार के तनाव भी दूर होते है.

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है. इसे प्राचीन साहित्य में अवन्तिका पुरी के नाम से भी जाना जाता था. इस ज्योतिर्लिंग की खास विशेषता यह है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है.

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग:

बता दें कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी स्थित है. यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा किनारे मान्धाता पर्वत पर विरजमान है. इन दोनों ही शिवलिंग की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग से की जाती है. यह ज्योतिर्लिंग औंकार आकार का है. यही वजह है कि इसे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाती है.

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग हिमालय की चोटी पर स्थित श्री केदरनाथ जी का है. यह अलकनंदा व मंदाकिनी नदियों के तट स्थल पर स्थित है. श्री केदरनाथ को ‘केदारेश्वर’ भी कहा जाता है. कहा जाता है जो भी श्रद्धालु केदरनाथ भगवान का दर्शन किए बगौर यदि बद्रीनाथ क्षेत्र की यात्रा करता है तो उसकी यात्रा व्यर्थ मानी जाती है.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है. बता दें कि इस पर्वत से भीमा नदी भी गुजरती है. इस ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है जो भी व्यक्ति इस मंदिर के रोज सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके साथ जन्मों के पाप दूर हो जाते है.

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग काशी में है. कहा जाता है कि काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजित है. बताया जाता है कि हिमालय को छोड़कर शिव जी ने यही स्थायी निवास बनाया था.

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग नासिक जिले में पंचवटी से करीब अठारह मील की दूरी पर है. यह गोदावरी नदी के तट पर स्थित है. इसे म्बक ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर भी काहा जाता है. यहां ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी भी निकलती है.

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग बिहार के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में है. पुराणों में इस स्थान को चिताभूमि भी कहा जाता था. कहा जाता है कि रावण ने तप के बल से शिव को लंका ले जा रहें थे, लेकिन रास्ते में व्यवधान आ जाने शिव जी को यहीं स्थापित किया गया. इसे ‘वैद्यनाथधाम’ भी कहते है.

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथ पुरं नामक स्थान में स्थित है. कहा जाता है कि लंका की चढ़ाई से पहले भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना यहीं की थी. भगवान राम द्वारा स्थापित होने की वजह से इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है. यह हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग:

इस ज्योतिर्लिंग को गुजरात में द्वारकापुरी से 17 मील दूर स्थित है. इस जगह को दारूकावन भी कहा जाता है. बताया जाता है कि जो भक्त अपनी पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है उसकी सभी इच्छा पूरी होती है.

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग:

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र क्षेत्र के दौलताबाद से 12 मील दूर बेरुल गांव में विराजमान है. इस स्थान को शिवालय भी कहा जाता है. इस ज्योतिर्लिंग को लोग घुश्मेश्वर और घृष्णेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. यहां पर लोगों दूर-दूर से दर्शन के लिए आते है.