आज से शुरू हुई गणेश चतुर्थी, जानिए क्या है भगवान गणेश जी से जुड़े अनसुने तथ्य

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नई दिल्ली: आज से पुरे देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व बनाया जा रहा है. जिसको लेकर काफी धूमधाम देखने को मिल रहीं है. इस अवसर पर घरों में गणेश जी की मूर्ति लाई जाती है. गणेश जी दस दिन के लिए घर में मेहमान बनकर आते है. तो चलिए गणेश चतुर्थी के इस पवन अवसर पर जानते है भगवान गणेश से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जिसे जानकर आप हैरान रहे जाएंगे….

गणेश जी भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र है

बता दें कि गणेश जी भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र है. गणेश जी की पूरी आकृति में सबसे अहम उनकी सूंड मानी जाती है. इसके अलावा उनके दो बड़े कान और बड़ा सा पेट भी है. आप शायद ही जानते होंगे पर गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. पढ़ाई, धन, लाभ, ज्ञान और अच्छी सेहत के लिए भी गणेश जी की पूजा की जाती है. ये ही नहीं, अधिकतर हिंदू के शादी के कार्ड में गणेश जी की तस्वीर जरुर होती है क्योंकि ये शुभ माना जाता है. शिव महापुराण के अनुसार, गणेश जी का शरीर लाल और हरे रंगा का होता है.

माँ पार्वती ने संतान पाने के लिए पुण्यक व्रत भी रखा था

ब्रह्मावैवर्त पुराण के मुताबिक, माँ पार्वती ने संतान पाने के लिए पुण्यक व्रत भी रखा था. कहा जाता है की माँ पार्वती द्वारा रखे गए इस व्रत की महिमा से ही पार्वती माँ को गणेश जी संतान के रूप में प्राप्त हुए थे. माना जाता है जब सभी देवी-देवता गणेश जी को आशीर्वाद दे रहें थे तब शनि देव सिर को झुकाए खड़े थे. ये देखने पर पार्वती माँ ने शनि देव से उनके सिर झुकाने का कारण भी पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर वो गणेश जी को देखेंगे तो हो सकता है कि उनका सिर शरीर से अलग हो जाएगा. लेकिन पार्वती जी के कहने पर शनि देव ने नजर उठा कर देख लिया, जिसके तहत गणेश जी का सिर उनके शरीर से अलग हो गया.

भगवान श्रीहरि ने अपने गरुड़ की सहायत से हथिनी के बच्चे का सिर कटाकर गणेश जी के शरीर से लगा दिया था

ब्रह्मावैवर्त पुराण में ये भी बताया गया है कि शनि देव के देखने के कारण जब गणेश जी का सिर उनके शरीर से अलग हुए तो उस वक्त मौजूद भगवान श्रीहरि ने अपना गरुड़ उत्तर दिशा की ओर फेंका, जो पुष्य भद्रा नदी की तरफ जा पहुंचा था. वहां पर एक हथिनी अपने बच्चे के साथ सो रहीं थी. भगवान श्रीहरि ने अपने गरुड़ की सहायत से हथिनी के बच्चे का सिर कटाकर गणेश जी के शरीर से लगा दिया था. जिसके बाद से गणेश जी को पुनः जन्म मिला.

ब्रह्मावैवर्त पुराण के तहत, भगवान शिव ने एक बार गुस्से से सूर्य देव पर त्रिशूल से हमला किया था, भगवान शिव की इस चीज से सूर्य देव के पिता काफी क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान शिव को श्राप दिया कि जिस तरह भगवान शिव ने उनके पुत्र के शरीर को नुकसान पहुंचाया है ठीक उसी प्रकार एक दिन भगवान शिव के पुत्र यानी गणेश जी का शरीर भी कटेगा.

गणेश जी को देख तुलसी देवी उनके प्रति आकर्षित हो गई और उन्हें शादी का प्रस्ताव भी दिया

ये भी मान्यता है कि एक दिन तुलसी देवी गंगा घाट के किनारे से जा रहीं थी. उस दौरान गणेश जी वहां पर स्थित ध्यान कर रहें थे. गणेश जी को देख तुलसी देवी उनके प्रति आकर्षित हो गई और उन्हें शादी का प्रस्ताव भी दिया. लेकिन गणेश जी ने उनके शादी के प्रस्ताव से इंकार कर दिया था. न सुनने के कारण तुलसी देवी काफी गुस्से में आ गई, जिसके बाद तुलसीदेवी ने गणेश जी को श्राप दिया कि उनकी शादी जल्दी ही हो जाएगी. जिसके बाद गणेश जी ने भी उन्हें पौधा बनने का श्राप दे दिया था.

शिव महापुराण में यह भी कहा गया है गणेश जी की तो पत्नियां थी पहली रिद्धि और दूसरी सिद्धि और उनके दो संतान शुभ और लाभ भी है. आज से शुरू इस अवसर पर लोगों काफी खुशी और उल्लास के साथ इन दिनों को मानते है. तमाम मंदिरों में भगवान गणेश जी के दर्शन को लेकर काफी भक्तों का जमावडा देखने को मिल रहा हैं, वहीं मुंबई के लाल बाग मंदिर में गणेश चतुर्थी को लेकर काफी रौनक नज़र आ रहीं है. कई जगाहों के लोग भगवान गणेश के दर्शन के लिए इकठ्ठा हो रहे है.