जानिए भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का रहस्य

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lord shiva
जानिए भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का रहस्य

यह सही है कि भारत में नागकुल और नागों के रहस्य को सुलझाना अत्यंत ही कठिन है. क्या पहले यह सर्प मानव थे या फिर सर्प जातियों के नाम के आधार पर ही मानव की जातियों का निर्माण हुआ है यह प्रश्न लोगों के मन में बना रहता है. चलिए हम आपको बताते है कि भगवान शिव के गले में लिपटे सांप के बारे में, कुछ भी हो लेकिन यह तो तय है कि सभी नाग प्रजातिया भगवान शिव की भक्त थी और उनका धर्म शैव घर्म ही था.

वासुकिके भगवान शिव के परम भक्त थे. ऐसा माना जाता है कि नाग जाति के लोगों ने ही सर्वप्रथम शिवलिंग की पूजा का प्रचलन शुरू किया था. वासुकि की भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान शिव ने उन्हें अपने गणों में शामिल कर लिया था. वासुकी को नागलोक का राजा कहा जाता है.

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इतना ही नहीं समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को ही रस्सी के रूप में मेरू पर्वत के चारों और लपेटा गया था. इसी के कारण उनका सारा शरीर लहूलुहान हो गया था. जब भगवान श्री कृष्ण को कंस की जेल से वसुदेव चुपचाप गोकुल ले जा रहे थे. तभी रास्ते में जोरदार बारिश होई, इसी बारिश और यमुना के उफान से वासुकी नाग ने ही श्री कृष्क्ष की रक्षा की. वासुकी ने ही कुंति पुत्र भीम को दस हजार हाथियों के बल की प्राप्ति का वरदान दिया था.

कैसे उत्पत्ति हुई नागों की
पुराणों अनुसार सभी नागों की उत्पत्ति ऋषि कश्यप की पत्नि कद्रू की कोख से हुई है. कद्रू ने हजारों पुत्रों को जन्म दिया था जिसमें प्रमुख नाग थे- अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख, पिंगला और कुलिक कद्रू दक्ष प्रजापति की कन्या थीं.

अनंत, वासुकी, तक्षक, कार्कोटक और पिंगला इन पांच नागों के कुल के लोगों का ही भारत में वर्चस्व था. यह सभी कश्यप वंशी थे. इन्ही से नागवंश चला. वेबदुनिया के शोधानुसार नाग वंशावलियों में ‘शेष नाग’ को नागों का प्रथम राजा माना जाता है. शेष नाग को ही ‘अनंत’ नाम से भी जाना जाता है. वासुकी का कैलाश पर्वत के पास ही राज्य था और मान्यता है कि तक्षक ने ही तक्षकशिला बसाकर अपने नाम से ‘तक्षक’ कुल चलाया था.

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एक सिद्धांत अनुसार ये मूलत
कांगड़ा, कुल्लू व कश्मीर सहित अन्य पहाड़ी इलाकों में नाग ब्राह्मणों की एक जाति आज भी मौजूद है. महाभारत काल में पूरे भारत वर्ष में नागा जातियों का समूह फैले हुए था. विशेष तौर पर कैलाश पर्वत से सटे हुए इलाकों से असम, मणिपुर, नागालैंड तक इनका प्रभुत्व था. नागवंशियों ने भारत के कई हिस्सों पर राज किया था। इसी कारण भारत के कई शहर और गांव ‘नाग’ शब्द पर आधारित हैं