तेलंगाना: ₹326 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में ED की बड़ी कार्रवाई, 7 ठिकानों पर तलाशी
तेलंगाना में 326.49 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट…
तेलंगाना में 326.49 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (KVPL) और उससे जुड़े लोगों के सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत शुक्रवार को की गई।
ईडी की जांच का आधार केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 8 दिसंबर 2022 को दर्ज की गई एक FIR है। यह एफआईआर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत पर मेसर्स केवीपीएल के निदेशकों और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थी। आरोप है कि कंपनी ने PNB के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह के साथ धोखाधड़ी की, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ। इस समूह में आईडीबीआई बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा भी शामिल हैं।
छापेमारी में क्या मिला?
तलाशी के दौरान ईडी को फंड को घुमाने और उसकी परतें छिपाने से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा, अधिकारियों ने 15 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी भी बरामद की। एजेंसी ने कई अचल संपत्तियों और निवेशों की भी पहचान की है। जिन जगहों पर छापेमारी हुई, उनमें केवीपीएल का पंजीकृत कार्यालय, इसके निदेशकों के आवास और वे ठिकाने शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल बैंक फंड को दूसरी जगह भेजने में किया गया था।
कैसे हुई करोड़ों की धोखाधड़ी?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केवीपीएल को दी गई बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने पाया कि स्टील खरीद के फर्जी चालान (इनवॉइस) और परिवहन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके फंड को संबंधित संस्थाओं और बिचौलियों के माध्यम से दूसरी जगह भेज दिया गया। यह भी पता चला कि केवीपीएल ने कर्ज देने वाले बैंकों की जानकारी के बिना, कंसोर्टियम व्यवस्था के बाहर भी बैंक खाते संचालित किए थे। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



