हवाई सुरक्षा  के लिए केवल तेजस ही काफी नहीं हैं, भारतीय वायुसेना को तेजस से आगे सोचना होगा

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भारत में बने पहले लडाकु विमान तेजस ने भारतीय वायुसेना में आधिकारिक रुप से अपनी जगह बना ली हैं। यह 33 साल से ज्यादा की मेहनत हैं, तब जा के भारत को अपना पहला स्वदेशी लडाकु विमान मिला हैं।

भारतीय वायुसेना को तेजस का मिलना एक ताकत हैं। लेकिन केवल तेजस के बलबूते ही भारतीय वायुसेना का आधुनिकरण नही किया जा सकता हैं। तेजस एक हल्का लडाकु विमान हैं यह पूरी तरह से खतरनाक तो हैं। फिर भी यह सुखोई, ऱाफेल जैसे लडाकु विमानों से अभी पिछे हैं।

भारतीय वायुसेना में आधे से ज्यादा लडाकु विमानों का समय पूरा हो चुका हैं। मिग 21, मिराज, जगुआर यह सभी लडाकु विमान पुरानी पीडी के हो चुके हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक पांचवी पीडी के लडाकु विमानों की जरुरत हैं। हालांकि भारत ने फ्रांस से राफेल लडाकु विमानों का सौदा किया हैं, जिसमें फ्रांस की डसालट कंपनी भारत को 36 राफेल लडाकु विमान देगी।

अगर इस वक्त सुखोई 30 एमकेआई को छोड दे तो बाकि लडाकु विमान शायद युद्र लडने के काबिल हों। ऐसे में तेजस भारतीय वायुसेना को सिर्फ थोडी सी ही राहत दे पाएगा। भारत को अपनी वायुसेना को ताकतवर बनाने के लिए मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों मे काफी तेजी लानी होगी ताकि सेना के हाथियारों का निर्माण भारत में काफी तेजी के साथ किया जा सके। दुसरी तरफ भारत को अमेरिका, फ्रांस और रुस से विमान बनाने की तकनीक भी खरीदनी होगी अगर भारत खुद को ताकतवर बनाना चाहता है तो उसे बाहरी देशों से अत्याधुनिक हथियार खरीदने होंगे।

भारत को यह भी ध्यान रखने की जरुरत हैं कि जो देरी तेजस को बनाने में आई हैं वह देरी आगे के विमानों को बनाने में ना आएँ और रुस से लेकर अमेरिका तक सभी देशों से भारत को नई पीडी के लडाकु विमान और उनको बनाने की तकनीक भी खरीदनी होगी।

भारत के सामने इस वक्त दो चुनौतियां हैं, वो हैं चीन और पाक्सितान हालांकि पाकिस्तान भारत के साथ युद्र लडने का जोखिम नही लेगा लेकिन चीन ने जिस तरह से एनएसजी और डोकलाम में भारत के ख़िलाफ़ काम किया है और जिस तरह से वह भारत की सिमाओं में घुसपैठ करता हैं उसको देखकर ऐसा लगता है की चीन आने वाले वक्त में भारत के सामने सैन्य रुप से अपनी चुनौती पेश करेगा।

दुसरी तरफ भारत को अब चौथी पीडी के विमानों से हटकर पांचवी पीडी के विमानों की खरीदारी और उनको बनाने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि दुनिया अब धीरे धीरे पांचवी पीडी के लडाकु विमानों की तरफ बढ रही हैं। ऐसे में अगर भारत इक्सवी सदी की शुरुआत में लडाकु विमानों बनाने में पीछे रहेगा तो कही ना कही भारत का रक्षाझेञ उतना मजबूत नही बन पाएगा जितना मजबूत भारत इसको बनाना चाहता हैं।