तहसीलदार ने रिश्वत में मांगे पैसे, तो किसान ने कार से बांध दी भैंस

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तहसीलदार को रिश्वत में मांगे पैसे, तो किसान ने कार से बांध दी भैंस

ग्रामीण इलाकों में सूदखोरों और तहसीलदारों की यातनाओं का सताया हुआ एक आम इंसान रिश्वत मांगने पर क्या-क्या दे सकता है। आप यही कहेंगे कि कहीं से जुगाड़ करके थोड़े पैसे दे सकता है और अगर पैसे भी नहीं हैं तो वो क्या दे सकता है। जमीन वगैरह। आपका अनुमान सही हो सकता है। मगर क्या आपने कभी सोचा और देखा है कि एक गरीब किसान अपना काम करवाने के लिए मजबूर होकर अपनी भैंस को तहसीलदार की गाड़ी से बांध सकता है। जी, हां यही सच है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है।

मध्य के विदिशा जिले से एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप हंस भी दें। मगर यकीन मानिए, ये उस गरीब किसान की मजबूरी का जीता-जागता example है जो देश का अन्नदाता कहलाया जाता है। सिरोंज तहसील में नायब तहसीलदार ने जब एक व्यक्ति से 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी तो उसने तहसीलदार की गाड़ी से अपनी भैंस को बांध दिया। अब गाड़ी से बंधी इस भैंस ने सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक में सुर्खियां बटोर ली हैं और घटना अब भी सुर्खियों में बनी हुई है।


दरअसल, सिरोंज के ही रहने वाले किसान भूपत रघुवंशी का कहते है कि वो पिछले छ: महीने से अपने परिवार की जमीन के मामले के चक्कर में नायब तहसीलदार के पास आ रहे हैं, लेकिन वह काम करने से मना कर रहे हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं, मेरे पास पैसा नहीं है, मेरे पास मेरी भैंस ही सबसे ज्यादा कीमती है। इसलिए मैंने नायब तहसीलदार को वही दे दी। सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाले घटनाक्रम में भूपत रघुवंशी ने शुरू से लेकर अंत तक अपनी बेबसी और आपबीती सुना दी है।

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वहीं इस मामले में जो आरोप भूपत रघुवंशी ने लगाए हैं उन पर नायब तहसीलदार सिद्धार्थ सिंघल ने जवाब दिया है और इन आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है। सिद्धार्थ सिंघल जो कि नायब तहसीलदार हैं उनका का कहना है कि भूपत रघुवंशी ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। इतने में जब उनसे भूपत रघुवंशी के पेंडिंग काम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली।


लंबी बहस के बाद भूपत रघुवंशी अपनी भैंस वापस ले गए और अपना एक ज्ञापन मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए छोड़ गए। उन्होंने इस ज्ञापन को सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट को सौंप दिया है। एसडीएम का कहना है कि भूपेंद्र सिंह के द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी जांच की जा रही है।

फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच हो रही है, ऐसा कहना है एसडीएम का। मगर इस बात पर हर किसी को गौर करना चाहिए कि आखिरकार किसान ने क्यों मजबूर होकर अपनी भैंस को तहसीलदार की गाड़ी से बांध दिया।

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