तमिलनाडु भी मोदी शरण में?

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पिछले एक साल से तमीलनाडू की राजनीति में नाटकीय घटनाओं को देखा जाए, तो पहले रहस्यमयी ठंग से जयललिता की बीमारी के बाद, बार-बार नए मुख्यमंत्री का बनना से लेकर जयललिता की मौत और शशिकला का जेल जाना फिर के. पलानीस्वामी का मुख्यमंत्री बनना सुनने में तो किसी फिल्म की कहानी लगती है। लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में ‘एआईएडीएमके’ का एनडीए उम्मीदवार को समर्थन करने के बाद चर्चा ये है कि अब ‘एआईडीएमके’ भी केन्द्र में एनडीए सरकार को समर्थन करने जा रही है। ऐसे में तो यही कहा जाना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी और शाह की जोड़ी ने विपक्ष के ताबूत में एक और कील ठोक दिया है। बताना जरूरी है कि बीजेपी के बाद लोकसभा में एआईएडीएमके सबसे बड़ी पार्टी है। लोकसभा में इनके 37 सांसद हैं। ऐसे में एआईएडीएमके का एनडीए के साथ आना विपक्ष को एकदम से झटका होगा। अभी तो विपक्ष नीतीश कुमार के झटके से ऊभर नही पाई है।

एआईएडीएमके के आने से लाभ

एआईएडीएमके का केन्द्र सरकार को समर्थन करना मोदी के मिशन 2019 की सफलता को और भी मजबूत बनाएगा। यही नहीं दक्षिण भारत में भी बीजेपी की पकड़ मजबूत होगी जहां बीजेपी के पास ज्यादा कुछ है नहीं। आंध्रप्रदेश में टीडीपी-बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार है।

मोदी और शाह का बढ़ता प्रभाव

मोदी सरकार के सख्त रवैये और बड़े फैसलों के कारण सरकार चलाने में मोदी की कोई शानी नहीं है। वहीं पार्टी की मजबूती पर शाह को मोदी प्रभाव का पूरा लाभ मिल रहा है। राजनीति में मोदी के प्रभाव के सहारे अमित शाह एक के बाद एक फ़तह हासिल कर रहे हैं। मोदी के गुड गवर्नेंस और अपनी राजनीतिक कौशल के दम पर शाह ने पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक मोदी के परचम को लहराया है। शाह की कार्यकुशलता ने मोदी के पाले में एक के बाद एक राज्य को डाल दिया है। चुनाव में हार के बावजूद जोड़तोड़ की राजनीति से विपक्ष को अपने पक्ष में किया है। तमिलनाडू के एनडीए में शामिल होने के बाद शाह की सफलता में एक और राज्य जुड़ जाएगा। ऐसे में विपक्ष को 2019 में केवल चुनाव लड़ने भर का काम कर सकती है, जीतने का नहीं।

 

 

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