फिटनेस में सुधार, कैंसर की संभावना को कम कर सकता है

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फिटनेस इंसानी शरीर के लिए बहुत जरूरी होती है. ये तो सभी जानते है कि फिटनेस से हम कई बिमारियों और कैंसर जैसी बीमारी को भी कम कर सकते है. फिटनेस पर ध्यान देन पर इसका प्रभाव हमारे दिल पर पड़ता है, जिस पर अमेरिका में जॉन होपकिन्स विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक कैथरीन हैंडी मार्शल ने कहा है ” कैंसर के परिणामों पर फिटनेस के प्रभाव को देखने के लिए हमारा ये रिसर्च सबसे बडा और विभिन्न समूहों की इकाई में से एक है.”

मार्शल ने आगे यह भी कहा, “आमतौर पर आजकल डॉक्टरों के पास जाकर लोग फिटनेस टेस्टिंग करवाते हैं. पहले से ही कई लोगों के पास इसके नतीजे हो सकते हैं और उन्हें यह बताया किया जा चुका है कि फिटनेस का कैंसर की संभावनाओं पर क्या प्रभाव है और इसके साथ ही फिटनेस का स्तर अन्य चीजों जैसे कि दिल की बीमारियों के लिए क्या मायने रखती है.”

बता दें कि जो लोग अपनी सेहत को लेकर संवेदनशील नहीं रहते, उनके मुकाबले में जो लोग अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं, उनमें फेफड़े व कोलोरेक्टल कैंसर, कोलन कैंसर या बृहदांत्र कैंसर के होने की संभावना बहुत कम हो जाती है.

कैंसर के लक्षण:

डायरिया कोलन कैंसर का प्रमुख लक्षण है.

बिना किसी वजन के शरीर में खून की कमी होना.

अपच होना और लगातार वजन घटन है.

पेट के निचले हिस्से में लंबे समय से दर्द होना.

कोलोरेक्टल कैंसर

खाने की आदतों में बदलाव: ये लक्षण कोलोरेक्‍टल कैंसर में सबसे सामान्‍य हैं, इसमें व्‍यक्ति के खाने पीने की आदतों में बदलाव आने लगता है और कभी वे कम खाता है तो कभी ज़्यादा, परन्‍तु उसको हर समय ऐसा महसूस होता है कि पेट खाली नहीं है.

दस्त या कब्ज़: अगर किसी व्‍यक्ति को कोलोरेक्‍टल कैंसर हो जाता है तो उसे लगातार दस्‍त या कव्‍ज की शिकायत बनी रहती है.

स्टूल के रंग में परिवर्तन: कोलोरेक्‍टल कैंसर होने पर स्‍टूल के रंग में परिवर्तन देखने को मिलता है कभी स्‍टूल का रंग लाल तो कभी काला होता हैं.

स्टूल में रक्त का आना: कैंसर होने पर स्‍टूल में ब्‍लड आने लगता है परन्‍तु ब्‍लड का रंग भी लाल न होकर बहुत ज्‍यादा लाल या फिर काला होता हैं.

पेट में ऐंठन और पेट का भरा महसूस होना: लगातार पेट में ऐंठन और पेट का भरा महसूस होना, इसके लक्षणों में एक लक्षण ये भी शामिल है.

डायटिंग के बिना ही वज़न का कम होन: कोलोरेक्‍टल कैंसर होने पर किसी का भी वजन बिना डायटिंग किए कम होने लगता है.

थकान होना: कोलोरेक्‍टल कैंसर में व्‍यक्ति बिना किसी कार्य के हर समय थका-थका सा महसूस करता है.

बृहदान्त्र कैंसर

बुखार: यदि आंतों में एक ट्यूमर आंतों के माध्यम से टूट जाता है, तो एक फोड़ा, जो बुखार का कारण बनता है, हो सकता है.

साँस लेने में समस्या: यदि पेट का कैंसर फेफड़ों में फैल गया है, सांस की तकलीफ, खाँसी, और या सीने में दर्द हो सकता है.

सिरदर्द और तंत्रिका संबंधी समस्याएं: यदि पेट का कैंसर मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में फैलता है, तो सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव, भ्रम और / या दौरे पड़ सकते हैं.

हड्डी में दर्द: हड्डियों में कैंसर फैलने पर फ्रैक्चर, हड्डी में दर्द और कैल्शियम की उच्च मात्रा.

फिटनेश के साथ साथ अच्छी डयट एक ऐसी चीज है जिससे व्यक्ति अपने को फिट और स्वास्थ्य ऱख सकता है कैंसर जैसी भयानक बिमारी को भी कम कर सकता है.