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सिंडिकेट बैंक धोखाधड़ी मामला: मनी लॉन्ड्रिंग में पूर्व मैनेजर समेत 5 लोगों को 3 साल की सज़ा

गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने सिंडिकेट बैंक से जुड़े सालों पुराने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक पूर्व शाखा प्रबंधक समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…

सिंडिकेट बैंक धोखाधड़ी मामला: मनी लॉन्ड्रिंग में पूर्व मैनेजर समेत 5 लोगों को 3 साल की सज़ा
(फोटो: IANS)

गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने सिंडिकेट बैंक से जुड़े सालों पुराने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक पूर्व शाखा प्रबंधक समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक दोषी को तीन साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

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यह फैसला 3 नवंबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर केस नंबर 5/23 में आया। विशेष न्यायाधीश ने वी.एन. माथुर, राजीव कुमार, अरविंद चौधरी, अंकित चौधरी और प्रमोद कुमार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3 के तहत अपराध का दोषी पाया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोषियों को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी।

क्या था पूरा मामला?

ED ने यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू किया था। सीबीआई जांच सिंडिकेट बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर हुई थी। जांच में पता चला कि 2006-07 के दौरान बैंक की गजरौला शाखा के तत्कालीन प्रबंधक वी.एन. माथुर ने स्वर्गीय नरेंद्र सिंह, अरविंद चौधरी और अन्य के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी।

इस साजिश के तहत, उन्होंने जाली बिक्री दस्तावेजों (फर्जी सेल डीड), संपत्ति पर कोई भार न होने के झूठे प्रमाणपत्रों और गलत मूल्यांकन रिपोर्टों का इस्तेमाल किया। इन फर्जी कागजातों के आधार पर इन लोगों, उनकी फर्मों और सहयोगियों को अवैध रूप से लोन और ओवरड्राफ्ट की सीमाएं मंजूर कर दी गईं।

दो आरोपी CBI कोर्ट से हो गए थे बरी

दिलचस्प बात यह है कि मूल आपराधिक मामले में गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने सिर्फ तत्कालीन शाखा प्रबंधक वी.एन. माथुर को ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC के तहत दोषी ठहराया था। उसी कोर्ट ने राजीव कुमार और प्रमोद कुमार को बरी कर दिया था। हालांकि, ED ने अपनी जांच जारी रखी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उनके खिलाफ सबूत पेश किए, जिसके आधार पर अब PMLA कोर्ट ने उन्हें भी दोषी ठहराया है। ED ने इस फैसले को अपनी जांच के लिए एक अहम जीत बताया है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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