गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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झारखंड DGP नियुक्ति नियम: सुप्रीम कोर्ट ने कानून के विरुद्ध माना, मौजूदा डीजीपी को नोटिस जारी

झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर बनाए गए राज्य सरकार के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने गुरुवार को हुई…

झारखंड DGP नियुक्ति नियम: सुप्रीम कोर्ट ने कानून के विरुद्ध माना, मौजूदा डीजीपी को नोटिस जारी
(फोटो: IANS)

झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर बनाए गए राज्य सरकार के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने गुरुवार को हुई सुनवाई में कहा कि झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली का एक प्रावधान पहली नजर में 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में तय किए गए कानून के सीधे खिलाफ है।

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इसी के साथ, अदालत ने मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी तलवार लटकने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर संबंधित नियम को रद्द किया जाता है, तो उनकी नियुक्ति भी रद्द हो जाएगी। हालांकि, उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देते हुए एक नोटिस जारी किया गया है।

केंद्र सरकार ने क्यों दी चुनौती?

यह पूरा मामला केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका से शुरू हुआ। केंद्र ने झारखंड के ‘डीजीपी और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति विनियमन, 2025’ की वैधता को चुनौती दी है। 8 जनवरी, 2025 को अधिसूचित इस नियम के बारे में केंद्र का आरोप है कि इसे सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना बनाया गया और इसमें प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि झारखंड सरकार को लगातार बताया गया था कि वह डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कर रही है।

नियुक्ति पर उठे सवाल

केंद्र ने विशेष रूप से दो नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं। पहले, पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, जिन्हें 2 फरवरी, 2025 को नियुक्त किया गया था, जबकि उनका कार्यकाल केवल तीन महीने बचा था। दूसरे, मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा, जिन्हें 30 दिसंबर, 2025 को नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति से ठीक एक दिन पहले, 29 दिसंबर को राज्य सरकार ने नियम में संशोधन कर डीजीपी पद के लिए छह महीने की न्यूनतम शेष सेवा की शर्त को हटा दिया था। तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर, 2025 को निर्धारित थी।

अदालत में क्या हुआ?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र द्वारा सिर्फ झारखंड को निशाना बनाने पर सवाल उठाया। उन्होंने दलील दी कि अन्य राज्यों में भी ऐसे ही नियम हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर दूसरे राज्यों में भी गलत नियम हैं, तो उन्हें भी हटना चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार को संबंधित नियम पर फिर से विचार करने की छूट दी है और मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है। इस दौरान झारखंड सरकार और डीजीपी तदाशा मिश्रा दोनों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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