जमीन हड़पने का मामला: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को जमीन हड़पने के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को जमीन हड़पने के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को भी हटा दिया है।
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी में सरकारी जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने और धोखाधड़ी से उसके हस्तांतरण से जुड़ा है, जिसमें सुमित रॉय एक आरोपी हैं।
जांच और पूछताछ पर दलीलें
सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि रॉय से 11 बार में कुल 88 घंटे की पूछताछ हो चुकी है, लेकिन उनके खिलाफ कोई भी incriminating सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि रॉय का नाम FIR में नहीं था और जांच टीम ने उनसे केवल तृणमूल कांग्रेस के ऑडिट हो चुके खाते में जमा नकदी के बारे में ही पूछताछ की।
इसके जवाब में जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की, "पुष्टि यह है कि आपने अपने निजी खाते में बड़ी मात्रा में कैश जमा नहीं किया है, लेकिन एक राजनीतिक पार्टी के खाते में उसी समय कैश जमा किया गया था।" शंकरनारायणन ने जवाब दिया कि राजनीतिक चंदा कई ज्ञात स्रोतों से आता है और रॉय के निजी खाते में अधिकतम जमा राशि सिर्फ 60,000 रुपये थी।
कोर्ट का फैसला और आधार
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पाया कि गवाहों के बयानों से संकेत मिलता है कि रॉय को अवैध फंड सौंपे गए थे, जिसके बाद बैंक खातों में उसी दौरान नकदी जमा की गई थी। जांच एजेंसियों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पूछताछ जांच एजेंसी का अधिकार है और अदालतों को चल रही जांच की बारीकियों में नहीं उलझना चाहिए।
रॉय के वकील ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा कि 5 मई को चुनाव नतीजों के ठीक बाद 16 FIR दर्ज की गईं। लेकिन अंततः कोई ठोस आधार न पाते हुए कोर्ट ने रॉय की याचिका खारिज कर दी। रॉय ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
इनपुट: IANS



