शेयर बाज़ार में दिवाली से पहले रौनक: लगातार चौथे दिन बड़ी तेज़ी, सेंसेक्स 1200 अंक से ज़्यादा उछला
मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में निवेशकों के चेहरे खिल उठे, जब बाज़ार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में शानदार तेज़ी के साथ बंद हुआ। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़त की अगुवाई रोज़मर्रा के…
मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में निवेशकों के चेहरे खिल उठे, जब बाज़ार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में शानदार तेज़ी के साथ बंद हुआ। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़त की अगुवाई रोज़मर्रा के इस्तेमाल का सामान बनाने वाली कंपनियों (FMCG), रियल एस्टेट और खपत से जुड़े शेयरों ने की। दिन का कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62% की ज़बरदस्त छलांग लगाकर 76,917.85 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 370.05 अंक (1.58%) की मज़बूती के साथ 23,810.85 पर बंद हुआ।
किन सेक्टरों ने बाज़ार को दी रफ़्तार?
बाज़ार की इस रैली में सबसे आगे FMCG सेक्टर रहा, जहाँ निफ्टी FMCG इंडेक्स 3.65% चढ़ गया। इसके बाद निफ्टी रियल्टी में 2.33% और निफ्टी कंजप्शन में 2.29% की तेज़ी दर्ज की गई। इनके अलावा कई अन्य सूचकांकों ने भी शानदार प्रदर्शन किया:
- निफ्टी प्राइवेट बैंक: 1.98% ऊपर
- निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज: 1.84% ऊपर
- निफ्टी ऑटो: 1.71% ऊपर
- निफ्टी सर्विसेज और इंडिया डिफेंस: दोनों 1.33% ऊपर
- निफ्टी इन्फ्रा: 1.10% ऊपर
- निफ्टी ऑयल एंड गैस: 0.84% ऊपर
हालांकि, हर सेक्टर में हरियाली नहीं थी। सरकारी बैंकों के सूचकांक निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.27% की गिरावट देखी गई। साथ ही, निफ्टी मेटल 0.14% और निफ्टी एनर्जी 0.11% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। यह तेज़ी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.06% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.31% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
बाज़ार की तेज़ी के पीछे क्या हैं कारण?
बाज़ार के जानकारों ने बताया कि भारतीय इक्विटी बाज़ारों में सुधार का यह दौर कई सकारात्मक संकेतों से प्रेरित है। उनके अनुसार, "कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की फिर से बढ़ती दिलचस्पी ने हाल के मैक्रो दबावों को कम किया है। दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजों ने घरेलू विकास के नजरिए पर भरोसा और बढ़ाया है।"
विशेषज्ञों ने यह भी जोड़ा कि लंबे समय तक बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की वापसी से बाज़ार में नकदी (लिक्विडिटी) बढ़ी है। इसी वजह से "वित्तीय और उपभोग-आधारित क्षेत्रों की अगुवाई में बाजार में व्यापक भागीदारी देखने को मिली है।" भविष्य पर नज़र डालते हुए उन्होंने कहा कि यह तेज़ी कितनी टिकेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि "कंपनियों के बेहतर नतीजे, एफआईआई के लगातार निवेश, और तेल की कीमतों व वैश्विक यील्ड में नरमी बने रहने पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा भी बाजार के लिए अहम बाहरी कारक बने रहेंगे।"
इनपुट: IANS



