कच्चे तेल में नरमी का असर, भारतीय शेयर बाज़ार में दिखी शुरुआती बढ़त
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भारतीय शेयर बाज़ारों ने मंगलवार को सकारात्मक शुरुआत की। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और…
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भारतीय शेयर बाज़ारों ने मंगलवार को सकारात्मक शुरुआत की। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। सुबह 9:20 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 260 अंक (0.36%) की तेज़ी के साथ 74,782 पर पहुँच गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 83 अंक (0.35%) की बढ़त लेकर 23,411 के स्तर पर था।
बाज़ार की इस शुरुआती मज़बूती में मेटल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों की अहम भूमिका रही। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावनाओं के कारण कच्चे तेल के दामों में गिरावट आई है, जिससे बाज़ार की धारणा को बल मिला। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड अब 98.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
सेक्टर और शेयरों का हाल
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ज़्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी में सबसे ज़्यादा तेज़ी देखी गई। इनके अलावा, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो और प्राइवेट बैंक समेत कई अन्य सूचकांक भी हरे निशान में थे। एकमात्र निफ्टी आईटी इंडेक्स ही लाल निशान में कारोबार कर रहा था, जो इस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का संकेत है।
सेंसेक्स में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े शेयर शीर्ष पर थे। वहीं, टीसीएस, इन्फोसिस, एमएंडएम और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
बाज़ार की चाल और विशेषज्ञों की राय
बाज़ार में लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी तेज़ी का रुख़ रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.29% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.60% की बढ़त पर थे। जानकारों के मुताबिक, तकनीकी रूप से बाज़ार का ढाँचा हाल में कमज़ोर रहा है, और इस गिरावट के रुख़ को बदलने के लिए किसी बड़े सकारात्मक संकेत की ज़रूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में अच्छे विकास की उम्मीदों के कारण घरेलू निवेश आ रहा है, लेकिन इन सेगमेंट में मूल्यांकन (वैल्यूएशन) काफी बढ़ गया है।
इनपुट: IANS



