माता-पिता के पास वक्त नहीं, बेटे ने किया सुसाइड

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माता-पिता के पास वक्त नहीं, बेटे ने किया सुसाइड
माता-पिता के पास वक्त नहीं, बेटे ने किया सुसाइड

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास सब कुछ होता है, सिवाय वक्त के। रिश्तें वक्त देने से ही गहरे और मजबूत बनते है। ऐसे में जरूरत है कि एक बेहतर रिश्ता बनाने के लिए, उसे भरपूर वक्त दिया जाए। आजकल रिश्तों में लक्जरी तो देखने को मिलते है, सिर्फ वक्त की कमी दिखाई देती है। वक्त न देने से रिश्तों में दरार पनपने के साथ ही, लोगों का रिश्तों के प्रति से मोहमाया भी भंग हो जाता है, वो अपनी जिंदगी से छुटकारें की तलाश में जुट जाते हैं। ऐसा ही एक मामला एमपी के भोपाल ईलाकें से सामने आया है। आईये जानते हैं कि आखिर क्या पूरा मामला…

एमपी के भोपाल ईलाकें में रहने वाला बारहवीं का छात्र रवि ने खुदखुशी कर ली। दरअसल, सुसाइड नोट के मुताबिक, उसके अभिभावक ने उसे वक्त नहीं दिया, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में बारहवीं के छात्र ने यह लिखा है कि मेरे माता-पिता और बड़े लोगों के पास वक्त नहीं है, वो हमेशा व्यस्त रहते है, उन्होंने मुझे सबकुछ दिया, मुझे कोई कमी महसूस नहीं होने दी, बस उन्होंने मुझे वक्त नहीं दिया। साथ ही उसने तमाम अभिभावकों से विनती भी कि वो अपने बच्चों को समय दें, नहीं तो मेरी तरह किसी दिन वो भी कागज पर लिख कर चले जाएंगे।

मामलें पर गंभीरता से गौर किया जाए तो, मामला रिश्तों में वक्त की कमी होने की वजह से दुखी होकर छात्र ने सुसाइड किया। दरअसल, छात्र के पिता प्रोफेसर है और माता किसी ऑफिस में कार्यरत है। जिसकी वजह से दोनों के पास अपने बच्चे के लिए वक्त नहीं मिल पाता था। छात्र के अभिभावकों का कहना कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत होशियार था, दसवीं में उसके 97 फीसदी नंबर आये थे, वो बारहवीं की पढ़ाई के साथ-साथ आईआईटी की तैयारी भी कर रहा था।

परिजनों का कहना है कि उनके बेटे के मन में इस तरह की बात कब और कैसे आई, इस बात का उन्हें पता भी नहीं चला। हालांकि पुलिस मामलें की जांच में जुटी है। मौके पर मिले सुसाइड नोट से यह स्पष्ट होता है कि छात्र सिर्फ यह चाहता था कि स्कूल से वापसी के बाद उसके अभिभावक, उसका ख्याल रखें। बेटे के मौत के बाद पूरे घर में सन्नाटा का बसेरा हो चुका है, क्योंकि रवि उनका इकलौता बेटा था।

अब रवि के अभिभावकों को पछतावा हो रहा है कि अगर उन्होंने अपने बेटे को वक्त दिया होता तो आज उनका बेटा उनके बीच में होता। आप सभी अभिभावकों को इस घटना से सीख लेनी चाहिए कि अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा वक्त दें, उन्हें अकेला महसूस कभी न होने दें। साथ ही उन्हें यह एहसास दिलाये कि आप हर वक्त उनके साथ है। हम यही उम्मीद रखते है कि आप लोग अपने बच्चों को वक्त देंगे, उनका साथ देंगे, ताकि फिर से कोई रवि अपनी बलि न चढ़ा दे।

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