जब दलित दुल्हा चढ़ा घोड़ी तो हुआ कुछ ऐसा कि सरकार को शर्म से झुकाना पड़ गया अपना सर

गांधीनगर: गुजरात के गांधीनगर में कुछ लोगों ने दलित दुल्हे के घोड़ी में बैठने को लेकर आपत्ति जताई और बारात को कई देर तक रोका रखा. बताया जा रहा है कि यह लोगों दलित युवक के घोड़ी में चढ़कर बारात में जाने को लेकर नाराज थे. गुजरात में दलितों पर होने वाले यह अत्याचारों की घटनाएं काफी बढ़ रहीं है. एक बार फिर गुजरात के गांधीनगर में एक ऐसी घटना देखने को मिली. जानकारी के अनुसार, माणसा तहसील के पारसा गांव में दलित युवक की बारात को इसलिए रोका गया क्योंकि दूल्हा घोड़ी पर सवार था. इस मामले पर पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ माणसा तहसील के पारसा गांव में केस दर्ज किया हुआ है. मौके में पुलिस के पहुँचने के बाद दुल्हे की बारात निकली.

क्या है मामला

बता दें कि रविवार को घोड़ी पर बैठे दलित दुल्हे प्रशांत सोलंकी की बारात निकल रही थी. इस पर गांव के क्षत्रिय भड़क गए और उन्‍होंने घोड़ी के मालिक को धमकाना शुरू कर दिया. वहीं धमकी से डर कर घोड़ी का मालिक घोड़ी लेकर मौके से निकल गया. जैसे ही इस मामले के बारे में गांव के सरपंच को पता लगा तो उन्होंने ने फ़ौरन ही पुलिस को इस खबर की सूचना दी. जैसे पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तो धमकी देने वाले क्षत्रिय मौके से तुरंत रवाना हो गए. करीब 1-2 घंटे की देरी के बाद दुल्हे की बारात निकाली गई.

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इस घटना में गांधीनगर के अडिशनल एसपी विजय पटेल ने कहा कि पुलिस ने इस घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं शादी के समारोह को कड़ी सुरक्षा में संपन्न कराया गया है और आने वाले दलित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने के इंतजाम कर दिए गए हैं.

जिग्नेश मेवाणी का ट्वीट

इस घटना पर वडगांव के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीट कर सरकार को अपने निशाने पर साधा. उन्होंने ट्वीट में लिखा कि, कल डीजीपी प्रेस कांफ्रेंस पर कहा रहा था कि दलित सुरक्षित है लेकिन आज खबर मिल रही है कि गांधीनगर जिले के मानसा तहसील के पारसा गांव में दलित समाज के दूल्हे को घोड़ी से उतर कर उसको अपमानित किया गया साथ-साथ धमकी भी दी. यह सरकार का षड्यंत्र लग रहा है.

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इससे पहले भी गुजरात में एक दलित युवक को जूते पहनने में कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. इस पर उस युवक की कुछ लोगों ने जमकर पिटाई भी की. विडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दो लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया था. आए दिन दलित युवा में हो रहें इन अत्याचारों को कब रोकेगी सरकार. क्या सरकार का सच में यह कोई षड्यंत्र तो नहीं है.