बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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छोटे उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ का फंड: कैसे बदलेगी MSME की तस्वीर और बढ़ेगा निवेशकों का भरोसा?

छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक, यानी पूंजी की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय…

छोटे उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ का फंड: कैसे बदलेगी MSME की तस्वीर और बढ़ेगा निवेशकों का भरोसा?
(फोटो: IANS)

छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक, यानी पूंजी की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये के 'एसएमई ग्रोथ फंड' (SME Growth Fund) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ छोटे उद्योगों को फंड जुटाने में आसानी होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फंड केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पूरे MSME इकोसिस्टम को इक्विटी, नकदी और पेशेवर सहायता मुहैया कराना है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित क्षेत्रों में काम कर रहे बेहतरीन भारतीय उद्यमों के विस्तार में मदद करना है।

कैसे काम करेगा यह फंड?

पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के सीईओ रणजीत मेहता ने सरकार के इस कदम को बड़ा बताते हुए कहा कि यह छोटे उद्योगों की फंडिंग तक आसान पहुंच की समस्या का समाधान करेगा। उन्होंने बताया कि सरकार इस फंड में MSME IPO के जरिए इक्विटी के रूप में हिस्सा लेगी। जब सरकार खुद हिस्सेदार बनती है, तो इससे निजी निवेशकों का भी इन छोटी कंपनियों पर विश्वास बढ़ता है, जिससे उन्हें बाजार से अतिरिक्त पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।

40,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की क्षमता

कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FKCCI) के उपाध्यक्ष के. सतीश नागराज ने इस योजना के विस्तार की संभावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने IANS को बताया कि यह एक बहुत अच्छा कदम है, जिसमें सेबी से मंजूरी प्राप्त बैंकों के जरिए MSME को दस हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने समझाया कि इसका तीन गुना फायदा उठाया जाएगा, जिससे छोटे उद्योगों के लिए उपलब्ध कुल फंड लगभग चालीस हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। एक खास बात यह है कि इस योजना का लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के उद्यम हैं, जहां पहले निजी बैंक आसानी से नहीं पहुंचते थे।

इनपुट: IANS

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