भारत-पाक बॉर्डर पर स्मार्ट फेंसिंग की शुरुआत, सरहद होंगी मजबूत

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भारत और पकिस्तान की सीमा पर 365 दिनों तनाव की स्थति बनी रहती है. आतंकवादी हर सेकंड सीमा से भारत में घुसपैठ करने की तमाम कोशिशे करते रहते है. ऐसें में यह बेहद जरुरी है की देश की सरहदे एक दम मजबूत हो. आतंकी उस पार यानी पाकिस्तान से भारत की सीमा में घुस हमारे देश को नुक्सान पहुंचाते है. इसी को देखते हुए सीमा को मजबूत करने की दिशा में भारत ने सीमा पर स्मार्ट फेंस लगाने की तैयारी कर ली है. यह स्मार्ट फेंसिंग जम्मू-कश्मीर के बॉर्डर पर लगे जाएगी.

भारत और पकिस्तान की 3323 किमी लंबी है सीमा

भारत जहा घुसपैठ रोकने में कोई कसार नहीं छोड़ता वही पाकिस्तान घुसपैठ कराने के लिए हर चाल चलता है. लिहाजा इंटरनेशनल बॉर्डर की सुरक्षा कर रही बीएसएफ स्मार्ट फेंसिंग लगाने का पायलट प्रोजेक्ट जम्मू से शुरू कर रही है. भारत की 3,323 किमी सीमा पाकिस्तान से लगती है. पकिस्तान के आतंकवादियो की घुसपैठ रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरुरत है. स्मार्ट फेंस उसकी दिशा में एक कदम है.

इसराइल की है स्मार्ट फेंस वाली तकनीक

दरअसल केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को सरहद की निगरानी के लिए दो ‘स्मार्ट फेंसिंग’ परियोजना का उद्घाटन किया. इन परियोजनाओं को कम्प्रेहेंसिव इंटीग्रेटिड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईबीएमएस) कार्यक्रम के तहत शुरू किया जा रहा है. राजनाथ सिंह जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास अग्रिम क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे.

इस मौके पर राजनाथ ने कहा कि हमने स्मार्ट फेंस को लगाया है और CIBMS लगाया गया है, हम सुरक्षा को बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जब मैं इजराइल गया था तब हमने ये स्मार्ट फेंस देखा था उसके बाद हमने ये सोचा था कि ऐसी फेंसिंग बने आज ये बॉर्डर पर स्मार्ट फेन्स बन रही है.

क्या है स्मार्ट फेंसिंग और इसकी खुबिया ?

इन स्मार्ट फेंसिंग परियोजनाओं को जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 5.5 किलोमीटर क्षेत्र में तैयार गया है. यह अपनी तरह की पहली हाईटेक निगरानी प्रणाली होगी, जो जमीन, पानी, हवा और भूमिगत स्तर पर एक अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक दीवार का काम करेगी, जिससे सीमा सुरक्षाबल (बीएसएफ) के जवानों को अत्यधिक दुर्गम क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी.

इसके अलावा और क्या है खास ?

जल, थल और हवा तीनो में कामयाब है स्मार्ट फेंसिंग

सीआईबीएमएस के तहत अत्याधुनिक सर्विलांस टेक्नोलॉजी, थर्मल इमेजर्स, इन्फ्रारेड और लेजर आधारित घुसैपठ अलार्म हैं, जो एक अदृश्य जमीनी चारदीवारी की तरह काम करेंगे.

 

हवाई निगरानी के लिए एयरोस्टेट, सुरंगों के जरिए घुसपैठ का पता लगाने में मदद के लिए ग्राउंड सेंसर, पानी के रास्ते सेंसर युक्त सोनार सिस्टम, जमीन पर ऑप्टिकल फाइबर सेंसर हैं.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह कार्यक्रम सीमा प्रबंधन प्रणाली को ज्यादा मजबूत बनाता है, जो मानव संसाधन के साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी को जोड़कर काम करेगा.