मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए गए, SIR रद्द हो: NCP (SP) नेता नसीम सिद्दीकी की मांग
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने दावा किया है कि भारत की मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम कम कर दिए गए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर…
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने दावा किया है कि भारत की मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम कम कर दिए गए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए 'एसआईआर' (SIR) को रद्द करने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी ने कहा कि दुनिया भर के देश अपने मतदाताओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास करते हैं, जबकि भारत में इसे घटाया जा रहा है।
मुंबई में सिद्दीकी ने कहा, "140 करोड़ के इस देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से कम कर दिए गए हैं।" उन्होंने अनुमान लगाया कि देश के कुल मतदाताओं में से लगभग 20 से 25 प्रतिशत को सूची से हटा दिया गया है और उन्हें दोबारा नामांकित करने की सख्त आवश्यकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी उठाए सवाल
महिला आरक्षण विधेयक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसे सभी दलों ने सर्वसम्मति से पारित किया है, लेकिन इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "वरना इस संसद में फिर वही होगा कि जिनकी आबादी 7 प्रतिशत है, उनकी महिलाएं 70 प्रतिशत होंगी और भारत के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं संसद तक नहीं पहुंच पाएंगी।"
सिद्दीकी ने परिसीमन (Delimitation) की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इसे "कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना" बताते हुए आरोप लगाया कि यह दक्षिण भारत की संसदीय सीटों को कम करके उत्तर भारत में सीटें बढ़ाने की एक योजना है, जिसका विरोध हो रहा है।
सरकार के रवैये की आलोचना
केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने इसे "दमनकारी" और "संविधान को न मानने वाली" सरकार बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इस सरकार के खिलाफ लड़ेगा, उसे त्याग के लिए तैयार रहना होगा। 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार "हिटलरशाही" पर उतर आए, तो उसे बदलना ही चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, जैसा चाहें, वैसा कर लें।"
इनपुट: IANS



