श्रावस्ती एयरपोर्ट: निर्माण में गंभीर खामियों का आरोप, BJP विधायक ने CM योगी से उच्च-स्तरीय जांच की मांग की
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती हवाई अड्डे के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गोंडा सदर से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण…
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती हवाई अड्डे के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गोंडा सदर से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निर्माण में हुई गड़बड़ियों की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने IIT रुड़की की एक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि हवाई अड्डे के कई भवनों में निर्माण संबंधी गंभीर खामियां पाई गई हैं।
विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने 7 अक्टूबर को लिखे अपने पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यदायी संस्था के भुगतान और प्रतिभूति राशि पर रोक लगा दी जाए और सरकारी धन के नुकसान की वसूली की जाए।
IIT रुड़की की ऑडिट रिपोर्ट में क्या मिला?
पत्र के मुताबिक, हवाई अड्डे के भवनों का IIT रुड़की द्वारा एक संरचनात्मक ऑडिट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट 17 दिसंबर, 2025 (यह तारीख स्रोत में दी गई है) को शासन को भेजी गई थी। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- कमजोर निर्माण: फायर स्टेशन और बिजली सब-स्टेशन जैसी इमारतों में निर्माण के सिर्फ छह साल के भीतर ही कंक्रीट का असर सरियों तक पहुंच गया है और उनमें जंग लगना शुरू हो गया है।
- मानकों की अनदेखी: फायर स्टेशन के कॉलम में 40 मिलीमीटर कंक्रीट कवर के बजाय सिर्फ 10-15 मिलीमीटर का कवर पाया गया।
- टपकती छतें: टर्मिनल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) बिल्डिंग में वॉटरप्रूफिंग में दरारों के कारण रिसाव हो रहा है। हाल ही में हुए नवीनीकरण के बावजूद, सुरक्षा और संचार जैसे संवेदनशील कक्षों सहित लगभग सभी कमरों की छतें टपकती हैं, जिससे उपकरणों को नुकसान का खतरा है।
सुरक्षा से खिलवाड़ और गायब हुए दस्तावेज़
विधायक ने सबसे गंभीर चिंता स्वीकृत निर्माण ड्राइंग को लेकर जताई है। उनके अनुसार, IIT रुड़की को बार-बार मांगने पर भी निर्माण से जुड़े स्वीकृत संरचनात्मक ड्राइंग, डिजाइन और गणना संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जो रिकॉर्ड दिए गए, वे मौके पर हुए निर्माण से मेल नहीं खाते थे, जिससे डिजाइन की सही जांच ही नहीं हो सकी।
इसके अलावा, हवाई अड्डे की लगभग पांच किलोमीटर लंबी चारदीवारी के नीचे से नीलगाय और सियार जैसे जानवरों के रनवे तक पहुंचने की बात भी सामने आई है, जिससे विमानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। हाल ही में बना वॉच टावर भी तेज आंधी में क्षतिग्रस्त हो गया।
जांच के लिए क्या हैं मांगें?
प्रतीक भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री से एक उच्च-स्तरीय तकनीकी और प्रशासनिक समिति बनाने की मांग की है, जिसकी अध्यक्षता नागरिक उड्डयन विभाग से बाहर के किसी अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी करें। उन्होंने सुझाव दिया है कि समिति में स्वतंत्र विशेषज्ञों, लोक निर्माण विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी जाए। साथ ही, वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर मामले को सतर्कता विभाग को सौंपने की भी मांग की गई है।
इनपुट: IANS



