जिनपिंग की बढ़ती ताकत दुनियां और भारत के लिए खतरनाक

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का 19वीं कांग्रेस बुधवार से शुरू हो गई है। इस कांग्रेस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दोबारा राष्ट्रपति चुना जाना तय है। पहले दिन शी जिनपिंग ने अपनी वर्क रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कांग्रेस में कहा कि पार्टी कमांड का पालन करते हुए उनका लक्ष्य वर्ल्ड क्लास आर्म्ड फॉर्सेस बनाने पर है, जिससे कि वह युद्धों को जीत सके।

बुधवार को पार्टी के करीब 2300 अधिकारियों की मौजूदगी में कांग्रेस शुरू हो गई है। ये कांग्रेस 24 अक्टूबर तक चलेगी। अपनी वर्क रिपोर्ट पेश करते हुए शी ने कहा कि उन्होंने पिछले पांच साल में चीन की राष्ट्रीय कायाकल्प को सुधारा है। उनके कार्यकाल के दौरान चीन की जीडीपी 54 ट्रिलयन यूआन से बढ़कर 80 ट्रिलयन यूआन तक पहुंच गई है। जिनपिंग ने कहा कि चीन अपने गोल को तभी अचीव कर सकता है कि जब दुनिया में शांतिपूर्ण माहौल हो। उन्होंने कहा कि हमारे गोल एक ताकतवर आर्मी को तैयार करना है।

दुनियां के लिए शी जिनपिंग के लक्षण अच्छे नहीं हैं

शी जिंनपिंग की चाहत चीन में माओत्से तुंग की बराबरी का है यही नहीं वह चीन को अमेरिका की जगह सुपर पावर बनाने का सपना देख रहा है, जो कि अच्छे संकेत नहीं हैं। क्योंकि तब चीन को माओ की जरूरत थी। तब माओ ने अपनी सारी ताकत अपने देश को आंतरिक रूप से ताकतवर बनाने में लगा दी थी। लेकिन शी जिनपिंग ठीक इसके विपरीत अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा। वह अपनी सारी ताकत दुनियां के ऊपर वर्चस्व कायम करने के लिए करेगा। हमेशा वो सेना और युद्ध की बात करता है जो कि ना ही केवल दुनियां के अन्य देशों के लिए बल्कि भारत के लिए बेहद ही चिंता का विषय है। क्योंकि एशिया में भारत ही वो देश है जो शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीति के मार्ग में रुकावट पैदा कर रहा है और भारत में उसे रोकने की ताकत भी है। इसीलिए शी जिनपिंग भारत के लिए एक बड़ा खतरा है।

माओत्से तुंग ने छोटी बात के लिए किया था भारत पर हमला

इसमें कोई संदेह नहीं कि आज चीन की स्थिति हर रूप में भारत से बेहतर है। जब अमेरिका दुनियां का सुपर पावर था तब माओ ने 1962 में भारत पर केवल इस लिए हमला कर दिया था क्योंकि वो भारत को तिब्बत पर कब्जे के बाद बात-चीत की टेबल पर लाना चाहता था। शी जिनपिंग के इरादे उससे कहीं ज्यादा खतरनाक लगते हैं। चिंता की बात ये है कि रूस जैसे देश उसकी इस अराजक ताकत को बढ़ाने में लगे हुए हैं। शी जिनपिंग को मालूम है कि एशिया में भारत को साधने के बाद कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता है और इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत के कमजोर पड़ने के बाद अमेरिका चीन से सीधे टकरा नहीं सकता है।

भारत ओर चीन के टकराव से तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका

माओ बनने के सपने देखने वाले जिनपिंग को मालूम होना चाहिए कि भारत ना केवल युद्ध के क्षेत्र में काफी मजबूत हुआ है बल्कि वैश्विक स्तर पर कुटनीतिक तौर पर भी भारत पहले से काफी ऊभर कर आया है। वर्तमान में चीन का भारत पर वर्चस्व का मतलब है दुनियां में अमेरिका की जगह चीन का सुपर पावर के रूप में स्थापित होना। इस स्थिति में अगर भारत और चीन का टकराव होता है तो विश्वयुद्ध निश्चित है।

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