Shajapur: शिव ‘राज’ के सुशासन की सच्चाई, जान जोखिम में डाल ट्यूब के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं लोग

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Shajapur: शिव ‘राज’ के सुशासन की सच्चाई, जान जोखिम में डाल ट्यूब के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं लोग

शाजापुर: बारिश ने मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तबाही मचा रखी है। नदी-नाले उफान पर हैं। बांधों के गेट खोले गए हैं। कई इलाकों का संपर्क सूत्र टूटा हुआ है। लोगों को आने-जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, लेकिन शाजापुर जिले का एक ऐसा गांव है जहां बारिश नहीं भी होती है तो भी ग्रामीणों को इधर से उधर जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव के नजदीक ही पार्वती नदी पर स्टॉप डैम बनाया गया है जिसका पानी नालों के जरिए गांव की ओर बढ़ जाता है। इससे गांव बापचा का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है। गांव का स्कूल खुले हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन यहां के विद्यार्थियों ने स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी है। स्कूल जाने के लिए जो रास्ता है, उसके बीच में पार्वती नदी का पानी इस कदर हो जाता है कि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालना पड़ता है। इमरजेंसी सुविधा के लिए यहां के युवा तत्पर खड़े रहते हैं जो ट्रैक्टर के ट्यूब में हवा डाल कर लोगों को नदी के पानी से लबालब भरे नाले से इधर से उधर करवाते हैं।

बापचा गांव शाजापुर जिले के ग्राम पंचायत गणेशपुर का हिस्सा है। गांव तक पहुंचने के लिए करीब 5 -7 किलोमीटर लंबा रास्ता है जो पूरी तरह कच्चा है। बारिश के दिनों में इस रास्ते पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बापचा को मोहम्मदपुर मछनाइ गांव से जोड़ तो दिया गया, लेकिन बीच में बने नाले पर छोटी पुलिया होने से और पास से ही निकली पार्वती नदी उफान पर आने से भी इस गांव में जलभराव की स्थिति बन जाती है। गांव से कुछ दूरी पर पार्वती नदी पर स्टॉप डैम बनाया गया है जिसका पानी नहीं निकलने की वजह से वह धीरे-धीरे गांव की ओर नालों के जरिये बढ़ता है। जैसे-जैसे दूसरे क्षेत्रों में बारिश होती है, पार्वती का जलस्तर बढ़ता है, गांव के लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ती जाती हैं।

गांव के लोगों के लिए यह नाला लिए मुसीबत बन चुका है। सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूली छात्रों को होती है। हाई स्कूल और मिडिल स्कूल गांव से 5 किलोमीटर दूर मोहम्मदपुर मछनाइ गांव में है, लेकिन बच्चे पढ़ाई करने नहीं पहुंच पाते हैं। नाले पर इतना पानी हो जाता है कि माता-पिता उन्हें स्कूल नहीं भेज पाते हैं। वहीं, डिलीवरी या इमरजेंसी कार्यों के लिए भी यहां काफी समस्याएं आती हैं। इसके लिए गांव के युवा यहां रहते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में वे लोगों की मदद करते हैं। युवा ट्रैक्टर के ट्यूब में हवा डाल कर उसे रस्सी से बांधकर लोगों को इधर से उधर ले जाते हैं।

कई बार जिला प्रशासन से लेकर उच्च अधिकारियों एवं सीएम हेल्पलाइन तक में इसकी शिकायत की गई है, लेकिन अभी तक इनकी सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से एक नाव की मांग की है, लेकिन वह भी पूरी नहीं हो पा रही है। अधिकारी ग्रामीणों को प्राइवेट नाव लगाने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन आस-पास वह भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण अब गांव से पलायन करने को भी तैयार हैं।

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