सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान में आतंकियों को बसाया गया? शहबाज शरीफ के कबूलनामे से इमरान सरकार पर उठे गंभीर सवाल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बड़ा खुलासा करते हुए स्वीकार किया है कि 2019 और 2020 के दौरान अफगानिस्तान से लौटे आतंकवादियों को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बसाया गया था। समाचार एजेंसी IANS…

पाकिस्तान में आतंकियों को बसाया गया? शहबाज शरीफ के कबूलनामे से इमरान सरकार पर उठे गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बड़ा खुलासा करते हुए स्वीकार किया है कि 2019 और 2020 के दौरान अफगानिस्तान से लौटे आतंकवादियों को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बसाया गया था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीफ ने इस कदम के लिए सीधे तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, और दावा किया कि इसी वजह से देश में आतंकवाद की घटनाओं में फिर से तेजी आई।

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यह बयान पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब देश लंबे समय से आतंकियों को पनाह देने के आरोपों का सामना करता रहा है। 31 अक्टूबर को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक में शरीफ ने यह बात कही। उन्होंने यह तो बताया कि आतंकियों को वापस बसाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इस प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे और सुरक्षा एजेंसियों की इसमें क्या भूमिका थी।

पिछली सरकार पर आरोप और वित्तीय सवाल

प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा कि नवाज शरीफ के कार्यकाल में सामूहिक प्रयासों से आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था, लेकिन 2019-20 में आतंकियों के पुनर्वास के कारण सुरक्षा की स्थिति फिर बिगड़ गई। उन्होंने इस पूरे मामले के लिए तत्कालीन इमरान खान सरकार को दोषी ठहराया। हालांकि, पाकिस्तान की राजनीति में सेना के प्रभाव को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या इतना संवेदनशील फैसला सिर्फ राजनीतिक स्तर पर लिया गया होगा।

इसके साथ ही शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा को आतंकवाद से लड़ने के लिए मिले फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2010 के राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) पुरस्कार के तहत प्रांत को अब तक लगभग 800 अरब पाकिस्तानी रुपये मिल चुके हैं। उन्होंने पूछा कि इस भारी-भरकम रकम से कितने 'सेफ सिटी प्रोजेक्ट' बने या आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) को कितना मजबूत किया गया?

प्रशासनिक विफलता और पीटीआई का पलटवार

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रांत में पुलिस के हजारों पद खाली पड़े हैं। पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में करीब 8,000 पुलिस पद रिक्त हैं। शहबाज के इन आरोपों पर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने तीखा पलटवार किया है।

पीटीआई के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने कहा कि प्रधानमंत्री को उनकी पार्टी पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पीटीआई ने दावा किया कि इमरान खान के कार्यकाल में प्रांत में शांति थी और संघीय सरकार ने ही आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जरूरी संसाधन मुहैया नहीं कराए।

पाकिस्तान का नुकसान और भविष्य की चुनौती

अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान द्वारा चुकाई गई भारी कीमत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश ने इस जंग में करीब 80 हजार जानें गंवाई हैं और 150 से 200 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाया है। उन्होंने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले को देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा में लगाए गए गवर्नर शासन को एक अनिवार्य कदम बताया, क्योंकि उनके अनुसार प्रांत में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। शरीफ के इस कबूलनामे ने भारत की उन चिंताओं को फिर से सामने ला दिया है, जो वह लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को लेकर जताता रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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