शेयर बाज़ार में लगातार चौथे दिन गिरावट, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों को किया सतर्क
वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाज़ार बीते सप्ताह भारी दबाव में रहा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अवकाश के कारण कारोबारी…
वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाज़ार बीते सप्ताह भारी दबाव में रहा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अवकाश के कारण कारोबारी सप्ताह छोटा होने के बावजूद निवेशकों को राहत नहीं मिली और प्रमुख सूचकांकों में लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह भर के कारोबार में सेंसेक्स में लगभग 2.2% और निफ्टी 50 में करीब 2.4% की बड़ी गिरावट आई।
शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भी बाज़ार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 125.56 अंक (0.17%) गिरकर 73,123.83 पर, जबकि निफ्टी 87.65 अंक (0.39%) की गिरावट के साथ 22,600.00 पर बंद हुआ।
बाज़ार में गिरावट की मुख्य वजहें
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय घरेलू बाज़ारों के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इसी के चलते निवेशकों ने जोखिम भरे निवेशों से दूरी बना ली। इस बिकवाली का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों (लार्जकैप) तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों (मिडकैप और स्मॉलकैप) के शेयरों में और भी ज़्यादा तेज़ गिरावट देखी गई। ऊंचे वैल्यूएशन और लीवरेज्ड पोजीशन में कमी के कारण इन सेगमेंट में एक बड़ा करेक्शन आया।
सेक्टर-वार कैसा रहा प्रदर्शन?
क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ही एकमात्र ऐसा सेक्टर रहा, जिसने थोड़ी मज़बूती दिखाई। सप्ताह की शुरुआत में दबाव के बावजूद, बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद में आईटी शेयर लगभग स्थिर बंद हुए। इसके विपरीत, ब्याज दरों में बदलाव से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली हुई, क्योंकि बढ़ती लागत और मुनाफ़े पर पड़ने वाले दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कच्चा तेल और बाज़ार का भविष्य
वैश्विक कमोडिटी बाज़ार में ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को छह महीने के उच्चतम स्तर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जिसमें एक ही दिन में 3.1% की तेज़ी आई। पूरे सप्ताह में इसमें 6.2% की वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर परिवहन और ऊर्जा लागत पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ता मांग घट सकती है और तेल पर निर्भर उद्योगों का मार्जिन भी कम हो सकता है। आने वाले समय में निवेशकों की नज़र कच्चे तेल की चाल और इससे जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों पर ही टिकी रहेगी।
इनपुट: IANS



