ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माता वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि
भारत की स्वतंत्रता के समय ऐतिहासिक राजदंड 'सेंगोल' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र…
भारत की स्वतंत्रता के समय ऐतिहासिक राजदंड 'सेंगोल' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उनके देहावसान पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी श्रद्धांजलि में कहा, "तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु के निधन से गहरा दुख हुआ।" उन्होंने एथिराजुलु को तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित परिवार का सदस्य बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को भेंट किए गए सेंगोल के लिए याद किया। पीएम ने यह भी उल्लेख किया कि 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को गौरवपूर्ण स्थान देते समय उन्हें व्यक्तिगत रूप से एथिराजुलु से मिलने और राष्ट्र व संस्कृति में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का सम्मान मिला था।
श्रद्धांजलि और स्मरण
प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में आगे लिखा, "उनका जीवन और शिल्प कौशल भारत की गौरवशाली परंपराओं और हमारी राष्ट्रीय यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।"
तमिलनाडु राजभवन ने भी एथिराजुलु के निधन पर शोक संदेश जारी किया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि 1947 में केवल 20 वर्ष की आयु में पवित्र सेंगोल के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका थी। उन्होंने कहा कि सेंगोल भारत की सभ्यतागत विरासत, धर्मपूर्ण शासन और सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है, और इसमें एथिराजुलु के योगदान को हमेशा श्रद्धा और गर्व के साथ याद किया जाएगा। राज्यपाल ने उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की।
सेंगोल और उनका योगदान
वुम्मिदी एथिराजुलु ने 1947 में महज 20 साल की उम्र में इस ऐतिहासिक राजदंड को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। सेंगोल को भारत की सभ्यतागत विरासत, न्यायपूर्ण शासन और स्वतंत्रता के समय सत्ता के हस्तांतरण का एक कालातीत प्रतीक माना जाता है।
इनपुट: IANS



