करेंसी डेरिवेटिव्स में निवेश हुआ आसान, सेबी ने 5 मिलियन डॉलर तक बिना हेजिंग के दी मंजूरी
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने करेंसी डेरिवेटिव्स बाजार के नियमों में एक अहम बदलाव किया है, जिससे निवेशकों के लिए कारोबार करना और आसान हो जाएगा। नए नियमों के तहत अब घरेलू निवेशक और…
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने करेंसी डेरिवेटिव्स बाजार के नियमों में एक अहम बदलाव किया है, जिससे निवेशकों के लिए कारोबार करना और आसान हो जाएगा। नए नियमों के तहत अब घरेलू निवेशक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) बिना किसी Underlying Exposure के 5 मिलियन डॉलर तक की अनहेजेड करेंसी पोजीशन ले सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी एक सर्कुलर का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी IANS ने बताया कि यह 5 मिलियन डॉलर की सीमा सभी भारतीय रुपया करेंसी पेयर (जैसे डॉलर, यूरो, येन) को मिलाकर और सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर ली गई पोजीशन को जोड़कर तय की जाएगी। यह नियम किसी भी समय बकाया कुल एक्सपोजर पर लागू होगा। आसान शब्दों में, अब निवेशक 5 मिलियन डॉलर तक के सौदे सिर्फ मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर अनुमान लगाकर कर सकते हैं, उन्हें किसी निवेश को हेज (सुरक्षित) करने की जरूरत नहीं होगी।
FPI के लिए क्या हैं शर्तें?
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए कुछ विशेष नियम भी तय किए गए हैं। विदेशी मुद्रा और भारतीय रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स में, किसी भी एक्सचेंज पर FPI की शॉर्ट पोजीशन (मुद्रा के दाम गिरने पर दांव) 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं हो सकती। हालांकि, अगर कोई FPI 5 मिलियन डॉलर से अधिक की लॉन्ग पोजीशन (मुद्रा के दाम बढ़ने पर दांव) लेना चाहता है, तो उसे भारतीय डेट या इक्विटी सिक्योरिटीज में पहले से निवेश (Underlying Exposure) दिखाना होगा। FPIs के लिए इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स को भी इस निवेश के रूप में मान्यता दी गई है।
घरेलू निवेशकों और NRI के लिए अन्य राहत
घरेलू निवेशक रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित कुछ शर्तों का पालन करके 5 मिलियन डॉलर से अधिक की पोजीशन भी ले सकते हैं। इसके अलावा, सेबी ने हाल ही में भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROI) के लिए केवाईसी (KYC) नियमों में भी ढील दी है। इस फैसले का मकसद अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) और विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय वित्तीय बाजारों में निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाना है। नए नियम के अनुसार, जो निवेशक वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहते हैं, वे भारत आए बिना डिजिटल तरीके से अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। हालांकि, जो निवेशक FATF के नियमों का पालन न करने वाले देशों में रहते हैं, उन पर मौजूदा केवाईसी नियम ही लागू रहेंगे।
इनपुट: IANS



