मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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SCO बैठक में भारत का कड़ा संदेश: आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

दुशांबे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने में दोहरे…

SCO बैठक में भारत का कड़ा संदेश: आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
(फोटो: IANS)

दुशांबे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते और इसके पूरे तंत्र को सामूहिक प्रयासों से समाप्त करना अनिवार्य है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में SCO की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।"

सुरक्षा, संपर्क और अवसर

रक्षा मंत्री ने बिश्केक में हुए पिछले SCO शिखर सम्मेलन को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन से सुरक्षा, संपर्क और अवसर के क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि ये तीनों स्तंभ एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षा से निवेश के अवसर पैदा होते हैं, संपर्क से व्यापार को बढ़ावा मिलता है और इन दोनों से लोगों के लिए नए अवसर तैयार होते हैं।

सिंह ने कहा कि भारत एक ऐसा SCO चाहता है जो सदस्य देशों के बीच सहमति से काम करे और ठोस परिणाम दे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आर्थिक सहयोग और संपर्क परियोजनाएं

आर्थिक सहयोग पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने, व्यापार को सुगम बनाने और विकास के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया। भारत ने 2026-2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना का भी समर्थन किया।

संपर्क परियोजनाओं के महत्व पर उन्होंने कहा कि भारत ऐसी पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ें और विकास के अवसर पैदा करें। अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी सभी परियोजनाएं परामर्श और सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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