चित्रकूट में देश भर के वैज्ञानिक करेंगे चिंतन मंथन

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चित्रकूट, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी भारत (नासी) द्वारा महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय एवं दीनदयाल अनुसंधान, चित्रकूट के संयुक्त तत्वाधान में 6 से 8 दिसम्बर तक आयोजित नासी के 88 वें वार्षिक सत्र एवं ‘‘सतत् ग्रामीण विकास हेतु, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पारिस्थितिकी तंत्र‘‘ विषय की तैयारियों को अंतिम रूप प्रदान कर दिया गया है। आज आयोजक प्रायोजक संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के रजत जयन्ती कक्ष में कुलपति प्रो. नरेश चन्द्र गौतम ने आयोजन के तकनीकी, सैद्धान्तिक, वैज्ञानिक एवं व्यवस्थागत पक्षों पर प्रकाश डालते हुये पत्रकारों से विशेष बातचीत की।

प्रो. गौतम ने आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन में लगभग 1200 लोग प्रतिभाग करेंगें। देश के प्रख्यात वैज्ञानिक एवं लब्ध प्रतिष्ठ विद्वान संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों को सम्बोधित करेंगें। इस अवसर पर आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दिनांक 06 दिसम्बर को पूर्वान्ह 11 बजे महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विवेकानन्द सभागार में राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के अध्यक्ष प्रो. अनिल काकोडकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के पूर्व सचिव प्रो. मंजू शर्मा व कुलपति प्रो. नरेश चन्द्र गौतम उद्घाटन करेंगें। पत्रकार वार्ता में कुलपति प्रो. नरेश चन्द्र गौतम के साथ प्रमुख वैज्ञानिक डा. नीरज कुमार, डा. ए. के. श्रीवास्तव, अभय महाजन, प्रो. आई. पी. त्रिपाठी, डा. रमेश चन्द्र त्रिपाठी, डा. सूर्यकान्त चतुर्वेदी एवं मनोज त्रिपाठी उपस्थित रहे।      ज्ञातव्य हो कि राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी भारत (नासी) की स्थापना सन् 1930 में देश की सर्वप्रथम विज्ञान अकादमी के रूप में प्रो. मेघनाद साहा (महान वैज्ञानिक, दूरदर्शी तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के तत्कालीन प्रोफेसर) द्वारा की गयी, जिसका उद्देश्य समाज कल्याण एवं विकास हेतु सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत करना तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करना है। विज्ञान को लोकप्रिय बनाने एवं छात्र-छात्राओं एवं समाज के विभिन्न समुदायों के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके लिये देश के विभिन्न प्रदेशों/क्षेत्रों में अकादमी द्वारा स्थापित लगभग 21 शाखायें/अध्याय कार्यरत हैं। अकादमी शोधकार्यों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ वैज्ञानिकों द्वारा उत्कृष्ट उपलब्धियों को भी मान्यता प्रदान करती है। वर्तमान में अकादमी के समस्त कार्यक्रमों का संचालन अकादमी के अध्यक्ष प्रो. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता एवं दिशा निर्देशन में किया जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष जैसे प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन, प्रो. पी. एन. टंडन, प्रो. (श्रीमती मंजू शर्मा), प्रो. एस. के. जोशी, प्रो. अशोक मिश्रा, प्रो. आशीष दत्ता, प्रो. जे. पी. मित्तल, प्रो. वी.पी. काम्बोज, डा. कस्तूरी रंगन एवं प्रो. अखिलेश त्यागी द्वारा विज्ञान के प्रचार-प्रसार हेतु अथक प्रयास एवं सहयोग से अकादमी ने कई उपलब्धियां हासिल की है। अकादमी के अध्येताओं एवं सदस्यों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली के वित्तिय सहयोग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किये जाते हैं।

नासी के प्रशासनिक सचिव डा. नीरज कुमार ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का 88 वां वार्षिक सत्र एवं ‘‘सतत् ग्रामीण विकास हेतु, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पारिस्थितिकी तंत्र‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का आयोजन चित्रकूट के संयुक्त तत्वाधान में दिसम्बर 6-8, 2018 को चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। जिसका संयोजन प्रो. (श्रीमती) मंजू शर्मा, नासी-डी.एस.टी. प्रतिष्ठित महिला वैज्ञानिक चेयर एवं पूर्व सचिव, भारत सरकार कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि यह वार्षिक सत्र एवं संगोष्ठी अकादमी द्वारा आयोजित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती एवं अकादमी संस्थापक प्रो. मेघनाद साहा की 125वीं जयन्ती के उत्सव हेतु समर्पित है।

पत्रकार वार्ता के दौरान बताया गया कि इस अवसर पर भारत सरकार के विभिन्न विभागों के सचिव एवं देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक जैसे डा. त्रिलोचन महापात्रा, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, डा. रेनू स्वरूप, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, डा. शशिबाला सिंह, पूर्व महानिदेशक, रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (जीव विज्ञान), भारत सरकार, डा. पंजाब सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, डा. उषा बरवाले जेहर, निदेशक, महाराष्ट्र हाइब्रिड सीड्स कम्पनी प्रा. लि., प्रो. अशोक मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, नासी, पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई, मुख्य वक्ताओं के रूप में अपने विचार व्यक्त करेंगें। साथ ही देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं वैज्ञानिक संस्थानों के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण, वैज्ञानिक प्रतिभागी भी सम्मिलित होंगंे। संगोष्ठी में मुख्य रूप से ‘कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण‘, ‘नई स्वास्थ्य देखभाल हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी‘, ‘स्वच्छ उर्जा‘, ‘पारिस्थितिकी तंत्र एवं सतत् विकास‘, ‘उद्यमिता, कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर‘ जैसे विषयों पर चर्चा होगी, तथा विभिन्न प्रस्तावों एवं संस्तुतियों पर कार्यान्वयन रणनीति तय करेंगें।