गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
शिक्षा

विशेष बच्चों के लिए स्कूल बनेंगे ज़्यादा समावेशी, 72 लाख शिक्षक हुए प्रशिक्षित

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए पढ़ाई का माहौल बेहतर और समावेशी बनाने की एक बड़ी पहल शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक…

विशेष बच्चों के लिए स्कूल बनेंगे ज़्यादा समावेशी, 72 लाख शिक्षक हुए प्रशिक्षित
(फोटो: IANS)

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए पढ़ाई का माहौल बेहतर और समावेशी बनाने की एक बड़ी पहल शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक 60,000 से ज़्यादा स्कूलों के 72 लाख से अधिक शिक्षकों और अन्य स्टाफ को संवेदनशील बनाने का काम पूरा हो चुका है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल का हर कर्मचारी इन बच्चों की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझे और उनके लिए एक सुरक्षित व सहयोगात्मक माहौल तैयार करे।

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यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो सभी बच्चों के लिए समान और सुगम शिक्षा पर ज़ोर देते हैं।

क्या है 'प्रशस्त' पोर्टल और कैसे काम करता है?

इस राष्ट्रव्यापी अभियान को 'प्रशस्त' (PRASHASTH) पोर्टल के ज़रिए चलाया जा रहा है। यह एक डिजिटल माध्यम है, जो स्कूलों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बताई गई संभावित दिव्यांगताओं की शुरुआती पहचान में मदद करता है।

प्रक्रिया इस तरह काम करती है:

  1. पोर्टल पर एक जांच सूची (checklist) उपलब्ध है, जिसके ज़रिए शिक्षक बच्चों में दिखने वाले संकेतों के आधार पर प्रारंभिक जांच करते हैं।
  2. इसके बाद, विशेष शिक्षक इन मामलों की पुष्टि करते हैं।
  3. अगर ज़रूरत महसूस होती है, तो बच्चे को आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया में भी मदद की जाती है।

पिछले तीन महीनों से इस पोर्टल के माध्यम से सामान्य शिक्षकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। अक्टूबर में और भी स्कूलों के इस पहल से जुड़ने की उम्मीद है।

कौन-कौन हो रहा है शामिल?

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ़ शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि स्कूल के पूरे स्टाफ को शामिल किया गया है। 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध इस 30 मिनट के जागरूकता कार्यक्रम में स्कूल प्रमुखों, शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के साथ-साथ गैर-शिक्षण कर्मचारी भी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें स्कूल बस के ड्राइवर, क्लर्क, आया और हॉस्टल के वार्डन तक शामिल हैं। मंत्रालय का मानना है कि समावेशी शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्कूल की साझा ज़िम्मेदारी है।

इनपुट: IANS

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