डर के सेल्समेन !!!

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आज सुबह घर से दफ्तर के लिए निकला तो दिमाग केवल घडी पर था। हर रोज़ की तरह थोड़ा लेट था और इसलिए तेज़ी से मेट्रो स्टेशन की तरफ दौड़ लगा दी। मल्टीटास्किंग का जोरदार नमूना पेश करते हुए बटुआ , रुमाल चेक करते हुए दौड़ते दौड़ते आगे बड़ ही रहा था की अचानक मेरी दौड़ पर विराम लगाया एक कलश ने।

एक कलश जो अचानक एक हाथ के साथ मेरे रास्ते में आ गया। रुक कर सांस ली, होश संभाला तो सामने एक सांवले रंग के बाबा खड़े थे। सर से पांव तक भगवा रंग में ढके बाबा गले में माला के साथ शिव जी की एक बड़ी तस्वीर के साथ एक हाथ में कलश और दुसरे में नाग लिए हुए थे ।

आम तौर पर दान दक्षिणा को दूर से नमन कर के निकलने वाला मैं न जाने उस दिन किस ख्याल से रुका और अपना बटुआ टटोलने लगा। शायद मुझे उम्मीद थी की बाबा के आशीर्वाद से ऑफिस में मेरे बॉस मेरे लेट आने पर हल्ला न मचाये। बटुए में से एक पांच का सिक्का निकाल कर बाबा के कलश में डाल कर आगे बढ़ने ही लगा था की बाबा ने खुद ही मेरी जीवन गाथा के साथ एक सवाल जड़ दिया। अपने तेजस्वी दिमाग से बाबा ने पता लगा लिया कि कैसे मैं अपने जीवन में  बहुत मेहनत करता हूँ, कर्म व दिल अच्छा रखता हूँ, पर मुझे फल नहीं मिलता। बाबा कि इस अदा पर मैं मर मिटा कि कैसे उन्होंने मेरा वो संघर्ष भी देख लिया जो मैंने भी कभी नहीं देखा ।

बाबा ने बड़े दिल से पूछा “बेटा बोल जीवन में क्या चाहता है?”

पांच रूपये में सौदा बुरा नहीं था, तो मैंने भी बिना सोचे बोला “बहुत सारा प्यार।”

शुरू से ही तेज़ आवाज़ और रंगीन मिज़ाज़ का मालिक  होने  कि वजह से मेरे बोलने के अंदाज़ पर कुछ लोग पलट कर रुक कर देखने लगे कि चल क्या रहा है।

बाबा ने वरदान दिया ” जा दिया तुझे एक प्यार भरा जीवन”

बाबा ने झट से बोला अपने बटुए से एक नोट निकालो और नाग देवता के मुँह से छुवा दो, मैंने एक बीस का नोट निकाल कर नाग देवता के मुँह को छुवा दिया। मैं वो नोट वापस अपने बटुए में वापस डालता इतने में बाबा ने एक और बाण छोड़ा और झट से एक मंतर पड़ते हुए नाग देवता को मेरे गले में डाल दिया। बाबा बोले अब अपने बटुए से सबसे बड़ा नोट निकालो और ये नोट उसमे लपेट कर रख लो ।

मैंने भी एक आज्ञाकारी चेला बन कर 500 के नोट के साथ 20 का नोट लपेट दिया बाबा ने वो नोट लिया और साथ में नाग देवता को मेरे गले से लेकर उनके मुँह कि तरफ नोटों को मरोड़ कर बढ़ा दिया । उसके बाद बाबा ने जो किया वो चमत्कार था । बाबा ने जोर से मंतर पढ़ कर एक फूंक मारी और वो नोट गायब।

अब बाबा ने मेरे मेहनत के 520 रूपये नाग देवता को भोग चढ़ा दिए थे । मेरे चेहरे के हाव भाव अब बदलने लगे थे जिनको देख कर बाबा ने थोड़ा रंग बदला और नए मंतर पढ़ने शुरू किये। उसके बाद जो वहाँ हुआ वो एक मुशायरे से कम नहीं था ।

बाबा गाने वाले स्टाइल में बोले ,” क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जाना है “

जिसके जवाब में मैंने भी एक लाइन अर्ज़ कर दी: ” लंच के पैसे थे वो मेरे मुझको खाना खाना है “

बाबा ने फिर कोशिश की, ” पैसा पैसा मत कर बच्चा वो न तेरे न वो मेरे काम आएगा “

मैंने अपने हालात बताते हुए बोला,” जल्दी पैसे दे दो बाबा वरना मेरा हाफ डे लग जाएगा “

बाबा ने नया तीर चलाया,” बेटा ये पैसा तेरा वैष्णो देवी जाएगा “

मैंने कहा ” बाबा जी इतने में तो मेरा खुद का टिकट आ जाएगा”

अब बाबा मुझसे मेरी इच्छा का दाम मांगने लगे ” जीवन में तू ही बता तुझे क्या चाहिए, प्यार चाइये या पैसा चाहिए ?”

घडी की तरफ देखते हुए मैंने मुशायरे को रोकना ठीक समझा और आवाज़ में भार बढ़ाते हुए बोला ” पैसा “

अब बाबा समझ चुके थे की ये पैसा ले कर ही जाएगा तो उन्होंने मुझसे डील करने का फैसला किया, वह मुझे डर बेचने लगे। बाबा बोले क़ि “वो पैसा नाग देव के पेट में है और तू उनका खाना छीनना चाहता है? उनका पेट खाली कर के तू अपना बटुआ भरना चाहता है? नाग देव का क्रोध तू जनता नहीं है, मान जा वरना बहुत पछताएगा”

मैंने कहा “बाबा 520 में से 20 रख ले, नाग देवता का पेट आधा लीटर दूध से भर जाएगा ”

हार मानते हुए बाबा ने नाग देवता के कान में एक मंतर फूँका और ज़ोर से अपनी मुठी में उनका मुँह दबोच लिया। ऐसा लगा क़ि मुझपर आया सारा गुस्सा उन्होंने नाग पर उतार दिया । पर एक बार फिर चमत्कार करते हुए उन्होंने नाग देवता के पेट से मेरी 520 रूपये निकाल लिए । वो नोट मेरे हाथ में देते हुए बोले क़ि तूने नाग देवता का खाना छीन लिया पार्षद चढ़ा देना वरना अच्छा नहीं होगा। मैंने हाँ में सर हिला कर अपना नोट पकड़ा और बटुए में वापस सजा लिया। पर जब आखरी बार मैंने बाबा क़ि और नज़र डाली तो मुझे एक साधु नहीं, डर का सेल्समेन नज़र आया और मैं एक बात जानता हूँ क़ि कोई सेल्समेन हमे कुछ नहीं बेच सकता जब तक हम वो चीज़ खरीदना नहीं चाहते । अगर आप मेरी जगह होते तो क्या करते? अपनी राय जरूर कमेंट करें.


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