हे, ‘भारत रत्न’ सचिन और ‘वृद्ध सुंदरी’ रेखा आप संसद क्यों नहीं आते?

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हे क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, अगर आप क्रिकेट के भगवान नहीं बल्कि वैसे वाले भगवान होते तो आपको सब पता होता। लेकिन आप, हैं नहीं। कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं कि जिस राज्यसभा के आप नामित सदस्य हो, वहां हमारा और हमारे देश के भविष्य का निर्माण होता है। हे क्रिकेट के नाथ हम आपको एक बात याद दिलाना चाहते हैं। वो ये है कि पानी साफ करने वाले मशीन के एक विज्ञापन में कुछ बच्चों को अच्छा खेलते हुए देखकर आप कहते हैं, “इंडिया के ऐसे ही हजारों भविष्य सचिन, सिर्फ अशुद्ध पानी पीने से बीमार होकर  अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। इसीलिए इन बीमारियों से 100% संपूर्ण  सुरक्षा दे, (यहां आ कंपनी का नाम लेते हैं।) स्मार्ट आरओ। इन मासूम सपनों की सुरक्षा के लिए कमऑन इंडिया।

अब आप ये बताइये कि क्या आपको ये नहीं पता कि देश के संसद में अच्छे लोगों को नहीं चुने जाने के कारण हम 125 करोड़ भारतीयों का भविष्य गलत लोगों के हाथ में चला जाता है।यही नहीं भविष्य बर्बाद भी कर दिया जाता है। अब आप ये मत कहना कि ये बात आपको किसी ने बताई नहीं, तो हम भी आप से पूछेंगे कि वो पानी वाली बात आपको किसने बताई, अच्छा क्या बोला आपने- ओ वो बात आपको उस कंपनी ने कही थी और आपको उसके पैसे भी मिले थे, अच्छा। लेकिन पैसे तो आपको सांसदी का भी दिया जाता है। चाहे जितना भी मिले। अब आप ये मत कहना कि अब तक जितने मिले हैं उसके बदले 23 दिन संसद में उपस्थित रहा हूं। हे सरकार 5 साल में मात्र 23 दिन। बताइये कैसे होगा भविष्य का निर्माण जिसकी बात आप उस विज्ञापन में कर रहे हो? बताइये कैसे होंगे सपने पूरे? अब समय का बहाना मत बनायेगा, नहीं तो मैं भी पूछ लूंगा कि वो अंबानी के पार्टी में जाने के लिए समय कहां से निकल आता है।

रेखा

हे, सुंदरियों की सुंदरी रेखा क्या आपको अपनी ही फिल्म “उमराव जान” का गाना याद नहीं है, जिसमें कहते हैं-……इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार, दीवार-ओ-दर को ग़ौर से पहचान लीजिए…..। ये तो गलत बात है ना कि संसद के दीवार-ओ-दर को आपने ठीक से नहीं पहचाना। ठीक है आपको किसी ने ये लाइन गाकर नहीं सुनायी, लेकिन आपको शपथ तो दिलायी गई थी। पद और गोपनियता की। जिसमें आप कहती हैं कि ‘मैं अपने काम का सच्ची श्रद्धा के साथ निर्वहन करूंगी।’ हां, ठीक है कि आप कलाकार हैं वो भी बड़की लेकिन ये भी क्या कि आपको हर बात गाकर ही समझायी जाए। और फिर संसद में शपथ दिलाने वाले कोई गवैया थोड़ोही बैठे हैं। अरे नहीं, हम तो आपके दीवाने हैं ही, नहीं तो क्यों चुनते आपको अपना संसद पर दीवानगी के चक्कर में जिस भविष्य की बात आपके शागिर्द सांसद सचिन कर रहे हैं, उसे खराब करना थोड़े ही है। सचिन साहब का तो चलिए कि उनको घर, बाल-बच्चे संभालना पड़ता है और विज्ञापन भी करना पड़ता है। लेकिन रेखा जी आपको तो आज कल विज्ञापन भी नहीं मिल रहा है।

चलिए चलते-चलते हमारी आप दोनों से यही विनती है कि कृप्या हमारे लिए नहीं लेकिन देश के भविष्य के लिए तो संसद में उपस्थित रहा कीजिए। मत भूलये की देश के भविष्य में ही आपका भी भविष्य है।

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