बड़ी बेंच के पास गया सबरीमाला केस, जानिए क्या है पूरा मामला ?

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बड़ी बेंच के पास गया सबरीमाला केस जानिए क्या है पूरा मामला ?
बड़ी बेंच के पास गया सबरीमाला केस जानिए क्या है पूरा मामला ?
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सबरीमाला मंदिर केरल के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है। हर एक भक्त का यह अरमान होता है की एक बार सबरीमाला मंदिर के राजा अयप्पा के दर्शन करने का मौका मिल सके। लेकिन सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर अभी भी विवाद चल रहा है।

भारत का जाना माना मंदिर सबरीमाला काफी वक़्त से विवादों में घिरा है। महिलाओं का प्रवेश सबरीमाला मंदिर में वर्जित था।केरल के सबरीमाला विवाद को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को पांच जजों की बेंच ने बहुमत से बड़ी बेंच को सौंप दिया है। फिलहाल मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का फैसला बरकरार रहेगा और अब 7 जजों की बेंच इस मामले में अपना फैसला देगी। पांच जजों में से दो ने इसके खिलाफ अपना निर्णय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के मुताबिक सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई थी। जैसा ही यह फैसला सामने आया और 18 अक्टूबर 2018 को मंदिर के कपाट खुले, तो तमाम महिलाएं भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंचीं। उस समय माहौल बेहद तनावभरा था, क्योंकि मंदिर का बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजदू महिलाओं को प्रवेश देने के विरोध में थे।


मीडिया की गाड़ियां तोड़ी गईं, पथराव-लाठीचार्ज हुआ और लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। महिलाओं को मंदिर से 20 किमी पहले से रोक लिया गया था और कई महिलाओं को आधे रास्ते से लौटा दिया गया था। सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल से अस्तित्व में है और इसमें महिलाओं के प्रवेश पर विवाद भी दशकों पुराना चला आ रहा है। पुरोहित इसके पीछे यह तर्क देते है की भगवान अयप्पा नित्य ब्रह्मचारी माने जाते हैं, जिसकी वजह से उनके मंदिर में ऐसी महिलाओं का आना वर्जित है,ऐसी महिलाओं की उम्र 10 से 50 साल निर्धारित की है। माना गया कि इस उम्र की महिलाएं मासिक धर्म से गुज़रती है। इस वजह से उनकी शुद्धता पर सवाल उठया गया की मासिक धर्म होने की वजह से महिलाये शुद्ध नहीं रह सकती और भगवान के पास बिना शुद्ध हुए नहीं आया जा सकता।

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देश को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा का वक़्त हो गया है। जहा लड़के और लड़की को सामान अधिकार दिए गए है , दोनों दूसरे के कंधे से कन्धा मिलकर चल रहे है , क्या ऐसी विचारधारा देश की प्रगति में बाधा उत्तपन नहीं कर रहा, अगर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई फैसला आता है तो उसका ऐसे विरोध करना सही है सुप्रीम कोर्ट का आदेश आखिरी आदेश और सर्वोत्तम आदेश माना जाता है, उसके आदेश को चैलेंज करना किसी भी लिहाज़ से ठीक नहीं है। जिस देश में महिलाओ को देवी का रूप माना गया है , उस देवी के ही मंदिर प्रवेश में इतनी बाधा कहा से ठीक है।