रूस और उत्तर कोरिया ने राजनयिक संबंधों की 78वीं वर्षगांठ पर दोस्ती को और गहरा करने का संकल्प लिया
रूस और उत्तर कोरिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 78 साल पूरे होने के अवसर पर प्योंगयांग में…
रूस और उत्तर कोरिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 78 साल पूरे होने के अवसर पर प्योंगयांग में आयोजित एक समारोह में जताई गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों ने साझेदारी को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
यह आयोजन प्योंगयांग के ताएदोंगगांग डिप्लोमैटिक क्लब में बुधवार को हुआ, जिसकी मेजबानी उत्तर कोरिया में रूस के नए राजदूत आंद्रेई पोडेलिशेव ने की। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, इस समारोह में देश के उप विदेश मंत्री किम जोंग-ग्यू भी शामिल हुए। यह राजदूत पोडेलिशेव का पदभार संभालने के बाद पहला स्वागत समारोह था।
साझेदारी का नया कानूनी आधार
राजदूत पोडेलिशेव ने दोनों देशों के संबंधों को 'अनुकरणीय' बताते हुए कहा कि यह पूर्ण समानता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने जून 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हस्ताक्षरित 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस संधि ने द्विपक्षीय सहयोग को गुणात्मक रूप से एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है और भविष्य के लिए एक उच्च मानक स्थापित किया है।
उत्तर कोरिया की प्रतिबद्धता
इस अवसर पर उत्तर कोरिया के उप विदेश मंत्री किम जोंग-ग्यू ने कहा कि रूस के साथ पारंपरिक दोस्ती और सहयोग का विस्तार करना उनके देश की एक अडिग नीति है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सामरिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का वादा किया। वक्ताओं ने शक्तिशाली देशों के निर्माण और जनता के कल्याण के साझा लक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला।
इस समारोह में रूस के आंतरिक मंत्रालय का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था, जो इन दिनों प्योंगयांग की यात्रा पर है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रवासन सेवा के उप प्रमुख डी.वी. सर्गिएन्को कर रहे हैं। गौरतलब है कि जून 2024 की संधि के बाद दोनों देशों के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं, जिसमें पारस्परिक रक्षा का प्रावधान भी शामिल है।
इनपुट: IANS



