कांग्रेस की हार के, ये हैं 3 कारण।

Reasons for failure of congress
कांग्रेस की हार के, ये हैं 3 कारण।

भले ही 2015 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस के वोट प्रतिशत में लगभग 13 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई हो लेकिन सीटों के मामले में कांग्रेस 2012 के एमसीडी चुनावों से करीब आधा पिछड़ गई है। माना जा रहा था कि कांग्रेस इस बार बेहतर करेगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। हमने जानने की कोशिश की, क्या हैं कांग्रेस की हार के कारण-
टिकट को लेकर विवाद –
कांग्रेस के सामने परेशानियां शुरू से ही आने लगी थीं। टिकट बंटवारे से लेकर प्रचार तक के दौरान पार्टी में फूट जैसी स्थिति साफ नजर आई। जैसे ही कांग्रेस कैंडिडेट्स की लिस्ट आई विवाद शुरू हो गए। कांग्रेस के ही नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन पर टिकट बंटवारे को लेकर आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। कई बड़े और पुराने पार्टी नेताओं ने सीधे तौर पर अजय माकन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सबसे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. अशोक वालिया ने विरोध दर्ज कराया इसके बाद उनके फेवर में कांग्रेस में रहे वरिष्ठ नेता अरविंदर सिंह लवली सहित कई नेता हारून युसूफ, मंगत राम सिंहल सहित कई नेता सामने आ गए। इन सबका कांग्रेस पार्टी के वोटरों पर सीधा असर पड़ा और इसका नतीजा एमसीडी चुनाव के रिजल्ट में भी साफ दिख रहा है।
प्रचार के लिए चेहरा नहीं –
इस चुनाव में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई खुलकर सामने आ गई। ऐसा लग रहा था कि सारा चुनाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के आसपास ही घूमता रहा। जिस शीला सरकार के कामों को लेकर चुनाव लड़ा जा रहा था, वह शीला दीक्षित एक दिन भी चुनाव प्रचार करने नहीं निकलीं। वह यह बात लगातार कहती रहीं उन्हें प्रचार के लिए नहीं बुलाया गया। वहीं माकन कहते रहे सभी को पत्र भेजे गए थे। ऐसे ही दिल्ली कांग्रेस के बड़े लीडर चाहे वे जय प्रकाश अग्रवाल हों, सज्जन कुमार हो या शीला सरकार में रहे मंत्री हों, कोई भी खुलकर प्रचार करते हुए दिखाई नहीं दिया। कुछ पार्षदों के प्रचार में तो ये लोग दिखे लेकिन पूरे दिल्ली में उनकी भूमिका ना के बराबर रही। इसका भी असर चुनाव पर पड़ता दिखाई दिया।
लवली सहित कई नेताओं का कांग्रेस से पलायन-
ईस्ट दिल्ली में कांग्रेस का चेहरा रहे और शीला सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए, दिल्ली के सिख वोटरों पर भी लवली की अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनके साथ प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अमित मलिक भी बीजेपी में चले गए। इसके बाद प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बरखा सिंह का भी चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी में जाना और उससे पहले पूर्व विधायक रहे कांग्रेस नेता अमरीश गौतम भी बीजेपी में चले गए। इससे भी लोगों में कांग्रेस के प्रति अविश्वास का माहौल बना। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी में चुनाव से पहले एक भगदड़ का सा माहौल देखने को मिला। इतने बड़े नेताओं के कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी में चले जाने का भी सीधा असर वोटरों के ऊपर पड़ा।