Goldman Sachs: भारत में रेपो रेट में 0.75% की और बढ़ोतरी संभव, विकास दर 7% रहने का अनुमान
वित्तीय सेवा कंपनी गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट में तीन बार और बढ़ोतरी कर सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
वित्तीय सेवा कंपनी गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट में तीन बार और बढ़ोतरी कर सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर यह वृद्धि 75 आधार अंक (0.75%) तक हो सकती है। हालांकि, इस दौरान देश की आर्थिक विकास दर लगभग 7 प्रतिशत पर बनी रह सकती है।
यह विश्लेषण गोल्डमैन सैश में भारत के मुख्य अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने शुक्रवार को दिया। उन्होंने अल नीनो को लेकर एक बड़ी चिंता जाहिर की, जिसके प्रभाव से भविष्य में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक वृद्धि पर बुरा असर पड़ सकता है।
ब्याज दरें और महंगाई का गणित
सेनगुप्ता के मुताबिक, RBI की ओर से रेपो रेट में ये तीन वृद्धियां दिसंबर, फरवरी और अप्रैल/जून में की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि अल नीनो का जोखिम अभी से ज्यादा 2027 के लिए बड़ा है, जिस पर कई वित्तीय बाजार भागीदारों ने अभी पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया है। उनके अनुसार, "हमारी राय में, अल नीनो एक ऐसा जोखिम है जिसका असर बाद में अधिक दिखेगा। जलाशयों में पानी का कम स्तर रबी (सर्दियों) की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।"
सेनगुप्ता ने यह भी कहा कि अगर 2027 तक अनाज के स्टॉक का स्तर कम होता है, तो इससे महंगाई और बढ़ सकती है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा इन्वेंट्री लेवल निकट भविष्य में महंगाई के दबाव को रोकने में मदद करेंगे और खरीफ की फसल पर अल नीनो का असर बहुत कम होगा।
आर्थिक वृद्धि के लिए अन्य जोखिम
गोल्डमैन सैश के अनुमानों के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतों से है। अनुमान है कि कीमतें 85 डॉलर से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहेंगी। सेनगुप्ता ने आगाह किया, "अगर कच्चे तेल की कीमतें असल में 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर बनी रहती हैं, तो यह आर्थिक विकास और महंगाई के लिए एक बड़ी बाधा होगी।"
विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं और उनका ध्यान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े मौकों पर है। सेनगुप्ता ने कहा, "दुनिया एआई की ओर बढ़ रही है। इस समय हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, वे मुख्य रूप से बाहरी हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस साल कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी 'मिड-टीन' (13-17%) की रेंज में रहने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



