नौ सौ से कम है राशन कार्ड तो बंद हो सकती है दुकान

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अगर आपके सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर राशनकार्ड धारकों की संख्या 900 से कम हैं तो जल्द ही दुकान बंद हो सकती है। इसके बाद हो न हो आपके राशनकार्ड को पास की बड़ी दुकान से संबद्ध कर दिया जायेगा। क्योंकि ऐसी दुकानों को बंद करने के लिए शासन स्तर पर विभागीय स्तर से पहल शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। आपूर्ति विभाग ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दुकानों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है। शासन से निर्देश दिए गए हैं एक राशन दुकान पर कम से कम चार से पांच हजार यूनिट होनी चाहिये।

फेयर एंड प्राइस एसेसिएशन के संयोजक अशोक मेहरोत्रा ने बताया कि इस संबंध में हाल ही में शासन स्तर पर बैठक हुई थी। जिसमें खाद्य एवं रसद मंत्री अतुल गर्ग ने शासन के अला अधिकरियों को इस संबंध में प्रदेश भर में कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। साथ ही पूरी रिपार्ट भी जनपद वर मांगी थी। खाद्य एवं रसद मंत्री के निर्देश के बाद राजधानी में इस संबंध में कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है। आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की मानें तो गत दिनों हुई समीक्षा में इस तरह की बात खुलकर सामने आई कि कुछ कोटे की दुकानें संचालित होने से कोटेदार को आर्थिक नुकसान होता है। ऐसे में उसकी भरपाई करने के लिए कोटेदार या तो खाद्यान्न लाभार्थियों को कम देता है या फिर अधिक पैसे वसूल करता है। ऐसे में क्यों नहीं इन दुकानों को बंद करके बड़ी दुकान बनाई जाये।

इससे दुकानदार का भी लाभ हो और लाभार्थियों को शासन की मंशा के अनुसार खाद्यान्न, केरोसिन आदि मिल सके। इसी क्रम में 900 से कम राशनकार्ड वाली दुकानों को चिन्हित करने के लिए आपूर्ति विभाग ने काम शुरू कर दिया है। अभी तक की जांच में राजधानी के शहरी इलकों में ही बरीअ पांच दर्जन से अधिक राशन दुकानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में 82 दुकानें ऐसी हैं जहां नौ सौ से कम राशन कार्ड हैं। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि ये दुकानें आने वाले समय में बंद की जा सकती हैं।

इसलिए उठाया जा रहा यह कदम

विभागीय अधिकारियों की मानें तो अगर किसी दुकान पर 900 लोगों के राशनकार्ड बने हैं तो वहां एक कार्ड पर औसतन चार यूनिट होगा। एक यूनिट पर पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। यानि कुल 2700 यूनिट हुआ। इतने कम यूनिट में राशन की उठान भी काफी कम होती है। अब इतना खाद्यान्न अगर दुकानदार बांटता है तो उसे कमीशन भीर पूरा नहीं मिलेगा, जिससे कि दुकान का किराया निकालना भी मुश्किल होता है। इसके अलावा एक हजार रुपये बिजली का बिल व अन्य स्टेशनरी खर्च होंगे। इस तरह से शेष बचना तो दूर की बात जेब से भी पैसा लगेगा। अब इतने में दुकानदार अपना खर्च चलाएगा या अपने परिवार का अथवा जिसे बांटने के सहयोगी के रूप में रखेगा उसे देगा। यानि दुकानदारी घाटे का सौदा हो गई।

अभी अन्य ङ्क्षबदुओं पर भी विचार चल रहा है

  • कुल दुकानों की संख्या 1350
  • 900 से कम कार्ड संख्या की दुकान 180 चिन्हित
  • कुल राशनकार्डों की संख्या छह लाख 54 हजार
  • कुल लाभार्थियों की संख्या यूनिट वार 24 लाख