Rapid Rail: आरआरटीएस स्टेशन पर मिलेगी इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग की सुविधा, साल 2023 तक शुरू होगी साहिबाबाद-दुहाई के बीच रैपिड रेल

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Rapid Rail: आरआरटीएस स्टेशन पर मिलेगी इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग की सुविधा, साल 2023 तक शुरू होगी साहिबाबाद-दुहाई के बीच रैपिड रेल

गाजियाबाद: साल 2023 में रैपिड रेल (rapid rail news) का संचालन साहिबाबाद से दुहाई के बीच शुरू होना है। इससे पहले नैशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने पब्लिक की सुविधाओं को अधिक से अधिक बढ़ाने की दिशा में काम तेज कर दिया है। आरआरटीएस (Regional Rapid Transit System) के स्टेशन पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा शुरू करने की तैयारी में एनसीआरटीसी के अधिकारी लगे हुए हैं।

एनसीआरटीसी के अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बहुत अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपने घर से बाइक या कार से आता है तो वह स्टेशन में अपने इलेक्ट्रिक वाहन को पार्क करके चला जाएगा। इस दौरान यदि वह वाहन को चार्ज करना चाहता है तो वहां पर उसे वाहन को चार्जिंग की सुविधा मिलेगी लेकिन इसका एक फिक्स चार्ज लिया जाएगा। फिलहाल अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पेट्रोल पंप की तरह चार्जिंग पॉइंट नहीं हैं।

लास्ट माइल कनेक्टिविटी की मिलेगी सुविधा
एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन से 500 मीटर का एरिया वॉकिंग जोन में आता है, जबकि एक किमी का एरिया साइकलिंग जोन में है। लेकिन जब किसी को तीन किमी तक जाना होता है तो उसके लिए बाइक टैक्सी, किराए पर स्कूटर, इलेक्ट्रिक रिक्शा, शेयरर्ड ऑटो रिक्शा की जरूरत होती है। लेकिन इससे अधिक दूरी तक जाने वाले यात्रियों को ऑटो रिक्शा, टैक्सी, कार रेंटल और शटल बस की जरूरत पड़ती है। पब्लिक को लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने के लिए अलग-अलग एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। रैपिड रेल की सुविधा शुरू किए जाने से पहले यात्रियों की इन सुविधाओं का इंतजाम कर दिया जाएगा।

कम होगी जाम की समस्या
सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट की तरफ से कुछ समय पहले सर्वे किया गया था कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बढ़ने के बाद भी सड़कों से जाम की समस्या खत्म नहीं हो रही है। सर्वे में यह पता चला था कि मेट्रो के अलावा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर फोकस नहीं किया गया है। इसकी वजह से सड़कों पर प्राइवेट वाहनों की संख्या कम नहीं हुई है जबकि दिन प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती चली जा रही है। सीआरआरआई के सीनियर वैज्ञानिक सुभाष का कहना है कि यदि रैपिड रेल में लास्ट माइल कनेक्टिविटी पब्लिक को मिलती है तो सड़कों से वाहनों की संख्या जरूर कम होगी। लेकिन एनसीआरटीसी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इससे पब्लिक का समय और पैसा ज्यादा नहीं खर्च होना चाहिए।

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